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मुकुल राय की मेहनत लाने लगी है रंग

 

कोलकाता बीजेपी से तृणमूल में आये मुकुल राय ने अपनी प्रतिभा का कमाल दिखाना शुरू कर दिया है। उनके आने के बाद तो बीजेपी नेताओं का एक के बाद एक तृणमूल में आने का सिलसिला शुरू हो चुका है। उत्तर बंगाल में भाजपा को झटका लगा है। यहां अलीपुरदुआर जिले के पार्टी अध्यक्ष गंगा प्रसाद शर्मा सोमवार को तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। उनके साथ प्रांत में भाजपा के सात अन्य नेताओं ने भी तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया। पार्टी मुख्यालय तृणमूल भवन में हुई इस ज्वाइनिंग के दौरान तृणमूल के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुखेंदु शेखर राय, तृणमूल नेता मुकुल राय, मंत्री ब्रात्य बसु उपस्थित रहे। इस दौरान मुकुल राय ने दावा किया कि यह बंगाल में भगवा दल की समाप्ति की शुरूआत है। मुकुल राय ने कहा कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के साथ ही भाजपा का उदय हुआ था और उसे उत्तर बंगाल में कई सीटों पर जीत मिली थी और अब इसी क्षेत्र से भगवा दल का पतन शुरू होगा। उन्होंने आरोप लगाया आगे जो होने वाला है, यह केवल उसकी झलक भर है। राज्य में भाजपा का पतन निकट है। वहीं गंगा प्रसाद शर्मा ने आरोप लगाया है कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव के टिकट बंटवारे के दौरान जमीनी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को नजरअंदाज किया। किसी भी फैसले पर स्थानीय नेताओं के सलाह मशविरा नहीं लिया गया है। कई बार तो फैसले लेने के बाद जिला नेताओं को जानकारी मिलती थी।

 

मुकुल रॉय की विधानसभा की सदस्यता खत्म कराने स्पीकर के पास पहुंचे शुभेंदु अधिकारी

चार साल तक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में काम करने वाले तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के बेहद करीबी नेता रहे मुकुल रॉय की विधानसभा सदस्यता खत्म कराने के लिए भगवा दल ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है. बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी तमाम कागजी कार्रवाई कर रहे हैं.
बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा से मुकुल रॉय को अयोग्य ठहराने की अपनी मांग के समर्थन में कागजी कार्रवाई पूरी कर ली है. बंगाल चुनाव के परिणाम आने और प्रदेश में ममता बनर्जी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार टीएमसी की सरकार बनने के बाद मुकुल रॉय हाल ही में बीजेपी से तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये थे.
बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा से मुकुल रॉय को अयोग्य ठहराने की अपनी मांग के समर्थन में कागजी कार्रवाई पूरी कर ली है. बंगाल चुनाव के परिणाम आने और प्रदेश में ममता बनर्जी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार टीएमसी की सरकार बनने के बाद मुकुल रॉय हाल ही में बीजेपी से तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये थे.

मुकुल राय के इस्तीफे की मांग

कोलकाता । वरिष्ठ नेता मुकुल राय के टीएमसी में शामिल होने के बाद अब उनके विधायक पद से इस्तीफा देने की मांग हो रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व सांसद दिलीप घोष ने भी मुकुल से विधायक पद से इस्तीफा देने की मांग की है।
श्री घोष ने कहा है कि चूंकि मुकुल रॉय अब दूसरे दल में चले गए हैं इसलिए उन्हें विधायक पद छोड़ देना चाहिए। इससे पहले विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी भी मुकुल राय से विधायक पद से इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। अधिकारी ने तो यहां तक अल्टीमेटम दिया है कि यदि श्री राय इस्तीफा नहीं देते हैं तो वह विधानसभा अध्यक्ष से मिलकर दल बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता खारिज करने की मांग करेंगे।

कमल की पंखुड़ियों को बिखेरने में जुटे मुकुल!

कोलकाता। राजनीति में कब क्या हो जाये कहा नहीं जा सकता। कल तक भाजपा के आंखों का तारा मुकुल राय आज तृणमूल कांग्रेस में हैं। उनकी घर वापसी शानदार रही। मुकुल राय के तृणमूल में जाने के बाद से भाजपा में कहासूनी भी शुरू हो गयी है। भाजपा के कुछ नेता अब कह रहे हैं कि उन्हें पहले से ही पता था कि मुकुल राय भाजपा ने टिक नहीं पायेंगे। इसमें कोई शक नहीं है कि मुकुल राय एक अच्छे रणनीतिकार व राजनीति के मजे खिलाड़ी हैं। लोकसभा चुनाव में उन्होेंने भाजपा के लिए काम करके यह साबित भी किया। बंगाल में भाजपा ने 18 सीट जीतकर चैका दिया था। अब खबर यह है कि तृणमूल कांगे्रस में आते ही मुकुल राय अपना जौहर दिखाने लगे हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा के 9 विधायकों और एक सांसद को फोन कर उनसे तृणमूल में शामिल होने के लिए कहा गया है। तृणमूल पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा के 3 विधायक और एक सांसद तृणमूल के संपर्क में हैं, ये कभी भी तृणमूल में शामिल हो सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि गत शुक्रवार को बनगांव में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष के नेतृत्व में भाजपा की सांगठनिक बैठक थी। इस बैठक में 3 भाजपा विधायकों को पहुंचना था जो नहीं पहुंचे थे। भाजपा सांसद शांतनु ठाकुर बैठक में नहीं आये थे। उनके अलावा गाइघाटा के विधायक सुब्रत ठाकुर, बागदा के विधायक विश्वजीत दास और बनगांव उत्तर के विधायक अशोक कीर्तनिया भी बैठक में नहीं आये थे।
विधायक विश्वजीत दास और भाजपा नेता सुनील सिंह के पार्टी से अलग सुर भी कई सवाल खड़े कर रही है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है कि कई नेता मौका देखकर भाजपा में आये थे। अब जबकि कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होने का समय है तो ऐसे ही अवसरवादी नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। हालांकि जो सच में लोगों की सेवा के लिए आये थे, वे भाजपा में हैं और आगे भी रहेंगे। तूफान आने पर घास, पत्ते भी भगवान की मूर्ति के माथे पर आ जाते हैं, लेकिन तूफान थमने के बाद उन्हें हटा दिया जाता है। जो खुद को घास, पत्ता समझते हैं वे तृणमूल में जाएंगे।

मुकुल रॉय जायेंगे राज्यसभा!

मुकुल रॉय की तृणमूल कांग्रेस में वापसी के बाद पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपस्थिति में मुकुल के तृणमूल में लौटने के बाद ही पार्टी के महासचिव पार्थ चटर्जी ने स्पष्ट कर दिया कि उनके आने से पार्टी की ताकत बढ़ी है। सूत्रों ने बताया है कि मुकुल रॉय को राज्यसभा भेजने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान राष्ट्रीय राजनीति में ममता बनर्जी की वैतरणी पार कराने के लिए मुकुल रॉय खेवनहार की भूमिका निभायेंगे।

मुकुल राय बेटे साथ मिलेंगे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से!, अब क्या करेगी बीजेपी

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कोलकाता । भाजपा नेता मुकुल राय व राजीव बनर्जी के दोबारा तृणमूल में वापसी करने को लेकर चर्चा हो रही है। पिछले कई दिनों से राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार मुकुल राय ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कालीघाट स्थित उनके आवास पर मिलने का फैसला किया है। उनके साथ उनके पुत्र भी होंगे।
दरअसल मुकुल और राजीब की भाजपा से अचानक से दूरी बढ़ गयी है और यही कारण है जो दोनों को लेकर सवाल हो रहे हैं। वहीं राजीब बनर्जी ने ममता बनर्जी सरकार के पक्ष में जिस तरह प्रतिक्रिया दी हैं, उससे यह तो साफ हो गया कि राजीब का झुकाव अभी भी दीदी की ओर है। वहीं तृणमूल नेताओं की ओर से इशारों में ऐसे संकेत दिये जा रहे हैं जिससे मुकुल के तृणमूल में वापसी के कयास लगातार बढ़ते चले जा रहे हैं । हालांकि जो कुछ हो रहा है उससे भाजपा नेता भी अंजान नहीं हैं। भाजपा नेत्री लाकेट चटर्जी ने तो यहां तक कह दिया है कि जो सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए भाजपा में आये थे वह जा सकते हैं।
तृणमूल नेता सौगत राय ने कहा है कि अभिषेक बंद्योपाध्याय के साथ कई लोग तृणमूल में वापसी के लिए सम्पर्क साध रहे हैं। चुनाव से पहले बहुत नेताओं ने पार्टी छोड़ी लेकिन कभी ममता बनर्जी का अपमान नहीं किया। बताते चले कि डोमजूर में करारी हार के बाद राजीब ने भाजपा से दूरी बना ली। अब राजीब तृणमूल में आते है तो क्या उनका स्वागत किया जाएगा यह एक सवाल है। तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने घर वापसी करने वाले नेताओं के लिए साफ कह दिया है कि ममता बनर्जी ही अंतिम फैसला लेंगी। अभिषेक ने कहा है कि सिर्फ तृणमूल छोड़कर जाने वाले ही नहीं बल्कि भाजपा के कई विधायक भी तृणमूल में आने की इच्छा प्रकाश कर चुके है। अब देखना है कि इन नेताओं की तृणमूल में एंट्री कब तक और किस तरह से होती है। दरअसल विधानसभा चुनाव के समय तृणमूल कांग्रेस के काफी नेता बीजेपी में शामिल हो गये थे। उनमें बड़े नाम भी थे। लेकिन जब भाजपा को सत्ता नहीं मिली तो वे नेता फिर से तृणमूल में आने की राह खोज रहे हैं। सच तो यह है कि कुछ लोग सत्ता के साथ ही रहना चाहते हैं, क्योंकि सत्ता का अपना अलग अंदाज होता है। हालांकि अभी देखना बाकी है कि बंगाल की राजनीति में क्या कुछ होता है।