Politics

Modi makes it to wretch, Galleries in RSF Free Press Predators

Modi listed in RSF’s ‘Predators of Press Freedom
Reporters Without Borders (RSF) recently released a list of 37 heads of state who have the lowest press freedom under their jurisdiction, including Prime Minister Narendra Modi.
Modi’s “close ties with billionaire businessmen who own vast media empires” have contributed to the dissemination of his nationalist-populist ideology through continual coverage of his “extremely divisive and derogatory” speeches, according to RSF’s entry.
The right to inform and be informed is regarded as a basic human right, and RSF is the world’s largest non-profit organization that works towards media freedom. In their 2021 World Press Freedom Index, India ranks at 142nd out of 180 countries.
Along with Pakistan’s Prime Minister Imran Khan, Myanmar’s military head Min Aung Hlaing, and North Korea’s S Leader Kim Jong-un, Modi has been mentioned among the “Predators of Press Freedom.” They have been listed alongside 33 other heads of state who “trample on press freedom by creating a censorship apparatus, jailing journalists arbitrarily, or inciting violence against journalists when they don’t have blood on their hands because they have directly or indirectly pushed for the murder of journalists,” according to RSF.
This list was last updated in 2016, with 17 new entries. There are world leaders on the list that have been on it since it was first published in 2001. Syria’s Bashar al-Assad, Iran’s Ali Khamenei, Russia’s Vladimir Putin, and Belarus’ Alexander Lukashenko were amongst them. Sheikh Hasina of Bangladesh and Carrie Lam of Hong Kong are the only two women on the list.
Modi has been Prime Minister of India since 2014, and according to the entry, he has been “a predator since coming to power.” RSF also mentions journalists who have been targeted by Modi’s hate, such as Gauri Lankesh, a journalist who was shot dead outside her home in 2017 for opposing Hindutva. They also cite Rana Ayyub and Barkha Dutt, who was threatened with gang rape and had their personal information leaked online to aid attacks.

“Khela Hobe Slogan” to now have its day in West Bengal.

Chief Minister Mamata Banerjee announced on Tuesday that the Trinamool Congress’s election slogan “Khela Hobe (The Game is On)” will be formally institutionalized as “Khela Hobe Diwas” in Bengal. The official date of this day is being assumed to be in July but has yet to be determined. The aim of this Diwas is to give football a boost at the grassroots level.

According to sources, the day will be modeled on Kanyashree Diwas, which is observed on August 14 to commemorate the Kanyashree direct-cash-transfer scheme for funding girls’ high school and college education. On Khela Hobe Diwas, the chief minister will deliver over 50,000 ‘Joyee’ brand footballs to registered sports groups across Bengal, created by the state’s refugee handicrafts unit.

On the other hand, in the state of Uttar Pradesh, where Assembly elections are just a few months away, the poster war over the now-famous West Bengal slogan “Khela hobe” is heating up. The ruling BJP has responded with posters proclaiming “2022 mein Khela na hoi” after the Samajwadi Party put up hoardings and banners with the slogan “2022 mein Khela hoi” in Kanpur and Varanasi.

Local politician Bachchi Yadav put up the BJP posters, which prominently feature the photograph of Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath. This is most likely the first time the Samajwadi Party and BJP have engaged in a direct poster war, and it is being waged through their workers.

Mamata fined 5 lakhs for seeking recusal, Justice Chanda exits Case

The Calcutta High Court on Wednesday imposed a fine of Rs 5 lakh on West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee. This fine was imposed because Mamata had demanded the removal of Justice Kaushik Chanda from hearing her case against BJP Leader Suvendu Adhikari’s Election win in Nandigram. Mamata had accused Justice Chanda of having links with the BJP. She further stated that a photo of Justice Chanda has surfaced, which he has seen with BJP leaders.
On June 24, Justice Chanda had reserved his decision in this case. He said Mamata Bannerjee tried to tarnish the judiciary’s image when he delivered the verdict on Wednesday. Justice Chanda, on the other hand, has opted to withdraw from the case.
On 2nd May, the results of the assembly elections held in 4 states and one union territory were declared in which Mamata Bannerjee lost the election from Nandigram constituency by 1956 votes. On the day of the result, Mamta demanded recounting of votes, which was refused by the Election Commission.
Later, Mamata went to the Calcutta High Court against the election results. She filed a petition in which she accused Suvendu Adhikari of bribery in elections, corruption, and seeking votes on the basis of religion and demanded cancellation of elections.

राजीब बनर्जी राजनीति में तलाश रहे रास्ते!

कोलकाता। राजनीति में धैर्य की महिमा बड़ी है। कहा भी जाता है कि यदि आप में धैर्य नहीं है तो आप राजनीति में न आएं। बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस से कई नेता दल बदलते हुए बीजेपी मेें शामिल हो गये थे। अब वही नेता फिर से तृणमूल में आने की जुग्गत में हैए लेकिन पार्टी का दरवाजा उनके लिए बंद कर दिया गया है।  विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने वाले राज्य के पूर्व मंत्री राजीब बनर्जी का समय उनका साथ नहीं दे रहा है। तभी तो पहले वह तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष से मुलाकात किये। इसके बाद पार्टी के महासचिव और शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के घर जाकर भी उनसे भेंट की थी। इसके बाद उनके तृणमूल में वापसी की अटकलें तेज हो गयी थीं। लेकिन लगता है काम बनते बनते रह गया। आखिरकार उन्होंने भाजपा नेतृत्व को दो पत्र भेजे हंै। इसमें उन्होंने लिखा है कि उनके इलाके डोमजूर में चुनाव बाद हिंसा के शिकार कई लोग अभी भी घर से लापता हैं। उन्हें घर लौटाने के लिए भाजपा नेतृत्व की मदद उन्होंने मांगी है। उन्होंने पहली चिट्ठी राज्य के महासचिव अमिताभ चक्रवर्ती को और दूसरी सह सचिव प्रताप बनर्जी को लिखी है।
अब माना जा रहा है कि इसके जरिए वह एक बार फिर पार्टी नेतृत्व को यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह पार्टी से दूर नहीं होना चाहते हैं। इधर भाजपा सूत्रों ने भी बताया है कि आगामी 29 जून को कोलकाता में भाजपा की कार्यकारिणी की बैठक होनी है। उसमें राजीब बनर्जी को भी आमंत्रित किया जाएगा। अब देखना है कि कार्यकारिणी की बैठक के बाद भाजपा उन्हें कितना महत्व देती है।

फर्जी टीकाकरण घोटाले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग

कोलकाता। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने केंद्रीय एजेंसी से टीकाकरण घोटाले की जांच कराने की मांग की है। विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन को पत्र लिखकर मांग किया है कि दक्षिण कोलकाता के कसबा टीकाकरण घोटाले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए। उन्होंने पत्र में लिखा है कि देवांजन देव नाम के एक व्यक्ति ने खुद को कोलकाता नगर निगम का संयुक्त आयुक्त बताकर कसबा के वार्ड नंबर 107 में केएमसी के बैनर तले अवैध टीकाकरण शिविर लगाया। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि गिरफ्तार देवांजन देव ने कोलकाता नगर निगम के संयुक्त आयुक्त के नाम पर विभिन्न स्थानों पर फर्जी टीकाकरण शिविर लगाये। भाजपा नेता ने कहा कि इस बात की पुष्टि करना आवश्यक है कि फर्जी टीकाकरण शिविर में कोविशिल्ड के नाम पर नकली वैक्सीन दी गयी है या नहीं।

बीजेपी सिलीगुड़ी युवा मोर्चा के नेता राज्यपाल से मिलने दार्जिलिंग पहुंचे

बीजेपी सिलीगुड़ी युवा मोर्चा के संरक्षक रतन दास, अध्यक्ष कंचन देवनाथ, उपाध्यक्ष अनिकेत दास राज्यपाल से मिलने के लिए दार्जिलिंग के लिए रवाना हुए हैं। उनकी ओर से राज्यपाल से मिलकर क्या कहा जायेगा यह देखने वाली बात होगी। इससे पहले गुरूवार को भारतीय जनता पार्टी के अलीपुरद्वार के सांसद जॉन बारला पंचायत सदस्यों, पंचायत प्रधान, जिला पंचायत के नेताओं के साथ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनकर से मिले थे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के पंचायत सदस्यों व कैडरों को परेशान करने का आरोप लगाया था। यही नहीं बारला की तरफ से कहा गया है कि उनके नेताओं को डराया धमकाया जा रहा है। पुलिस व प्रशासन के पास जाने पर भी किसी भी प्रकार की सुरक्षा नहीं दी जा रही है। राज्यपाल की ओर से उन्हें आश्वासन मिला है। कानून पर उनका अब भी भरोसा है। कानून से बड़ा कोई नहीं है। बताते चले कि अदालत के निर्देश पर राष्ट्रीय मानवाधिकार की टीम भी इन दिनों कूचबिहार के दौरे पर है। कूचबिहार में बीजेपी के कैडरों पर अत्याचार किये जाने का आरोप लगने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार की टीम इस बात का पता लगा रही है कि चुनाव के बाद राज्य में मानवाधिकार हनन के मामले हुए हैं या नहीं। वहीं राज्य के राज्यपाल जगदीप धनखड़ भी लगातार इस बात की ओर इशारा करते रहे हैं कि चुनाव के बाद राज्य में विपक्षी पार्टियों के कैडरों को जानबूझकर निशाना बनाया गया है। राज्यपाल स्वयं कूचबिहार में पीड़ितों से मिल चुके हैं। उनका यह भी कहना था निशाना बनाने वाले को खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं हुए हैं और न ही किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है।

कोरोना की दूसरी लहर के लिए सिर्फ केंद्र जिम्मेदार

कोलकाता। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोरोना की दूसरी लहर के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराया है। ममता ने कोरोना की वैक्सीन बांटने के तरीके को भी गलत करार दिया। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार को छह से आठ महीने का वक्त मिला था। उसमें उसने क्या किया? कोरोना की दूसरी लहर के लिए केंद्र ही जिम्मेदार है। उसका वैक्सीन बांटने का तरीका भी गलत है। महामारी फैलने के लिए विपक्ष को दोष क्यों दिया जा रहा है। चुनाव के दौरान कोरोना के मामलों में उछाल आ गया था। सब जानते हैं कि आठ चरणों में चुनाव कराए गए। हम लगातार मांग करते रहे कि चुनाव को एक चरण में कर दिया जाए लेकिन हमारी बात किसी ने नहीं सुनी। एक चरण में चुनाव कराने से समस्याएं कम होतीं। जब चुनाव थे, उस वक्त पॉजिटिविटी रेट 33 फीसद के पार चला गया था, लेकिन अब हालात काबू में हैं और पॉजिटिविटी रेट भी तीन फीसद से नीचे आ गया है। कई सारे उपचुनाव होने अभी बाकी हैं। अब हालात काबू में हैं तो एक हफ्ते में उपचुनाव कराए जा सकते हैं, हालांकि मुझे पता है कि जब पीएम बोलेंगे, तभी चुनाव कराए जाएंगे।

बीजेपी में शामिल होने का पश्चाताप, मुंडवाया सिर

कोलकाता । बंगाल विधानसभा चुनाव के समय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर भाजपा में काफी नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए थे। लेकिन अब बीजेपी से टीएमसी में आने का सिलसिला शुरू हो चुका है। लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि बीजेपी की चमक इतनी जल्द फिकी होने लगेगी इसका अनुमान किसी को नहीं था। मुकुल राय के टीएमसी में जाने के बाद हर दिन कोई न कोई नेता टीएमसी से नाता जोड़ रहा है। लेकिन एक घटना ने हर किसी चौकाया है। हुगली के खानाकुल विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नतिबपुर ग्राम पंचायत के शीतलातला इलाके में आयोजित कार्यक्रम में आरामबाग से तृणमूल सांसद अपरूपा पोद्दार की मौजूदगी में कुछ कार्यकर्ताओं ने घर वापसी की। खास बात यह है कि इनमें से कई कार्यकर्ताओं ने पार्टी में शामिल होने से पहले पश्चाताप स्वरूप अपना सिर भी मुंडवाया। इसके बाद तृणमूल का झंडा थामा।
गौरतलब है कि इससे पहले बीरभूम जिले में करीब 50 भाजपा कार्यकर्ताओं ने तृणमूल में वापस लिए जाने के लिए घंटों धरना दिया था, जिसके बाद उनके ऊपर गंगाजल का छिड़काव कर उन्हें पार्टी की सदस्यता दी गई थी। इधर, इस मौके पर तृणमूल सांसद अपरूपा पोद्दार ने कहा कि विधानसभा चुनाव के पहले ये लोग तृणमूल छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। लेकिन भाजपा में जाने का पश्चाताप करते हुए 500 से अधिक भाजपाईयों ने एक बार फिर से तृणमूल का दामन थामा हैं।

राजनीति के केंद्र में बंगाल

कोलकाता: इन दिनों राजनीति के केंद्र में बंगाल है। बंगाल की बात किये बिना राजनीति पूरी नहीं होती है। एक बार फिर बीजेपी के नेता शुवेंदु अधिकारी दिल्ली बुलाये गये हैं। 12 दिन के भीतर दूसरी बार वह दिल्ली बुलाये गये हैं। इन सबसे अलग तृणमूल कांग्रेस अब राष्टीय राजनीति में एंट्री की कोशिश में जुटी है और इस काम में उसका साथ प्रशांत किशोर दे रहे हैं। तभी तो प्रशांत देश के सभी विपक्षी बड़े नेताओं से मिल रहे हैं। लेकिन इन सब के बीच कांग्रेस को महत्व नहीं दिया जा रहा है। इससे खफा होकर कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चैधरी ने तृणमूल कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए कहा कि वे कांग्रेस के भाग्य विधाता नहीं हैं। अधीर रंजन चैधरी का यह बयान उन खबरों के परिप्रेक्ष्य में आया है, जिसमें यह कहा जा रहा है कि प्रशांत किशोर कांग्रेस को अलग रखकर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए तीसरे फ्रंट के गठन की कवायद में जुटे हुए हैं और इस बाबत विभिन्न भाजपा विरोधी दलों के नेताओं के साथ मुलाकात कर रहे हैं।
प्रशांत किशोर ने हाल में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार समेत कई नेताओं से मुलाकात की है। गौरतलब है कि प्रशांत किशोर ने अब तक कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के किसी भी नेता से मुलाकात नहीं की है।
अधीर रंजन चैधरी ने कहा-’प्रशांत किशोर कांग्रेस के भाग्य विधाता नहीं हैं। वे जिनके भाग्य विधाता हैं, वे ही इन सब बातों पर चर्चा करेंगे। वे क्या करने वाले हैं, इसे लेकर हम नहीं सोच रहे।’ शरद पवार की ओर से बुलाई गई बैठक के बारे में अधीर रंजन चैधरी ने कहा-’हमारी पार्टी की बैठक नहीं है। वे किसे बुलाएंगे और किसे नहीं, यह उनका मामला है।’ तृणमूल कांग्रेस बंगाल विधानसभा चुनाव में जबरदस्त जीत के बाद अब 2024 के लोकसभा चुनाव तक प्रशांत किशोर की सेवा लेगी। तृणमूल कांग्रेस के इस बाबत लिए जाने वाले सभी निर्णय में प्रशांत किशोर की अहम भूमिका होगी।

सांसद नुसरत जहां की संसद सदस्यता को  खत्म किए जाने की मांग

 

कोलकाता। निखिल जैन के साथ अपनी कथित शादी तोड़ने के बाद तृणमूल कांग्रेस की सांसद नुसरत जहां की संसद सदस्यता को भी खत्म किए जाने की मांग शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश के बदायूं से बीजेपी सांसद संघमित्रा मौर्य ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को पत्र लिखकर नुसरत की लोकसभा सदस्यता को रद्द कर दिए जाने की मांग की है।

सांसद संघमित्रा ने पश्चिम बंगाल की बशीरहाट से सांसद नुसरत जहां पर अमर्यादित आचरण का आरोप लगाते हुए कहा कि शादी को लेकर उन्होंने मतदाताओं को धोखे में रखा है। लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में संघमित्रा ने कहा कि नुसरत ने लोकसभा सदस्य के रूप में शपथ के दौरान अपने नाम का उच्चारण नुसरत जहां रूही जैन के तौर पर किया था। लोकसभा की वेबसाइट पर नुसरत जहां के पति का नाम निखिल जैन लिखा है। संघमित्रा ने नुसरत पर संसद की गरिमा को धूमिल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले को एथिक्स कमिटी को भेजा जाना चाहिए। साथ ही बीजेपी सांसद ने नुसरत के खिलाफ ऐक्शन लिए जाने की मांग भी की है। अपने पत्र में उन्होंने संसद में पहले दिन नुसरत का दुल्हन की तरह तैयार होकर आना ममता बनर्जी का रिसेप्शन में शामिल होने का जिक्र किया है।