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भड़काउ भाषण मामले में मिथुन चक्रवर्ती से पूछताछ

कोलकाता। बॉलिवुड ऐक्टर और बीजेपी नेता मिथुन चक्रवर्ती से भड़काऊ भाषण मामले में कोलकाता पुलिस पूछताछ कर रही है। मिथुन चक्रवर्ती पर पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव प्रचार के दौरान विवादास्पद बयान देने का आरोप है। महज संयोग ही कहें आज अभिनेता का जन्मदिन भी है।
कोलकाता पुलिस मिथुन से वर्चुअली पूछताछ कर रही है। मानिकतला में उनके भाषण को लेकर एक एफआईआर दर्ज की गई थी। इसे खारिज करने के लिए मिथुन ने हाई कोर्ट का रुख किया था लेकिन कोर्ट ने उन्हें सहयोग करने को कहा। हालांकि कोविड की वजह से पुलिस के सामने फिजिकली पेश होने से राहत दी थी।
मानिकतला में चुनाव प्रचार के दौरान मिथुन ने अपनी फिल्म के डायलॉग इस्तेमाल किए थे जिसे प्रकृति में उत्तेजक बताया गया। तृणमूल कांग्रेस ने भी उनके बयान पर आपत्ति जताई थी। मिथुन चक्रवर्ती बंगाल चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हुए थे। बताते चले कि विधानसभा चुनाव के समय मिथुन चक्रवर्ती बीजेपी में शामिल हुए थे। उस समय उन्होंने धुंआधार चुनाव प्रचार किया था। इस दौरान उन्होंने मंच से जनता को संबोधित भी किये और फिल्मी डायलाॅग के जरिये जनता का समर्थन हासिल करने की कोशिश किये थे।

मुकुल राय की नजर त्रिपुरा पर लगी!

भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष रहे मुकुल रॉय एक बार फिर से अपने पुराने दल यानी तृणमूल कांग्रेस में वापस आ गए हैं। अब इस बात की आशंका जाहिर की जा रही है कि जो लोग रॉय के साथ भाजपा में गए थे, क्या अब वह भी टीएमसी में लौटेंगे। बंगाल में तो टीएमसी का दावा है कि रॉय के करीबी 30 विधायक पार्टी में वापस आना चाहते हैं। वहीं बंगाल में हुए इस बदलाव का असर त्रिपुरा में देखने को मिल सकता है। रॉय के वफादर रहे त्रिपुरा के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ सुदीप रॉय भी टीएमसी नेता के साथ भाजपा में चले गए थे। अब जब रॉय वापस टीएमसी में आ गए हैं तो भाजपा इस बात को लेकर आशंकित है कि कहीं बर्मन भी अपने पुराने दल में ना चले जांए।
बंगाल के राजनीति गलियारों में चर्चा है कि त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब के साथ विवादों के चलते सुर्खियों में रहने वाले बर्मन अगर टीएमसी में वापस आए तो त्रिपुरा में सत्ताधारी भाजपा से कुछ विधायक भी उनका साथ दे सकते हैं। त्रिपुरा में एक प्रभावशाली राजनीतिक हस्ती माने जाने वाले बर्मन मुख्यमंत्री पद के लिए देब को चुनने के बाद से भाजपा से नाखुश बताए जाते हैं। वह कांग्रेस में रहते हुए विपक्ष के नेता थे और भाजपा में शामिल होने से पहले लगभग एक साल तक तृणमूल कांग्रेस के साथ रहे थे।
सूत्र बताते हैं कि बर्मन तृणमूल कांग्रेस में लौटने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन अगर बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने इसकी मंजूरी नहीं दी तो वह अपना खुद का संगठन भी बना सकते हैं
इधर चर्चा है कि बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी सोमवार को जब गवर्नर जगदीप धनखड़ से मिलने पहुंचे तो उनके साथ 74 में से सिर्फ 50 विधायक ही राजभवन पहुंचे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद से बंगाल भाजपा में बगावत को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।
बैठक में भाजपा के 74 में से 24 विधायक सुवेंदु अधिकारी के साथ नहीं आए। इस बात को लेकर अब राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। ये वाकया ऐसे वक्त में हुआ है, जब तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में आए तमाम नेता अब टीएमसी में फिर से वापसी की ओर हैं।

 

सांसद डाॅक्टर जयंत राय घायल बीजेपी नेता को देखने नर्सिंग होम पहुंचे

जलपाईगुड़ी के सांसद डाॅक्टर जयंत राय सोमवार को बीजेपी के घायल नेता व कार्यकर्ता को देखने के लिए सेवक रोड के आनंदलोक नर्सिंग होम में पहुंचे। वहां डाॅक्टरों मिलकर उन्होंने पूरी स्थिति की जानकारी ली। मीडिया से बातचीत करते हुए डाॅक्टर जयंत राय ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता की हालत स्थिर बनी हुई है। यहां इलाज सही तरीके से चल रहा है। सीने में रक्त जमा होने की शिकायत है। बताते चले कि आमबाड़ी इलाके में तीन दिन पहले सांसद जयंत राय समेत बीजेपी के तीन कार्यकर्ताओं पर कथित तौर पर टीएमसी के लोगों द्वारा हमला किया गया था। इसमें डाॅक्टर जयंत राय भी घायल हुए थे। उनका इलाज मेडिकल काॅलेज में किया गया था। हमले में एक बीजेपी कार्यकर्ता को काफी गंभीर चोट आयी थी, जिससे उसे निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। अपने साथ घायल हुए कार्यकर्ता को देखने के लिए वे आज यहां आये थे तथा चिकित्सा संबंधी विषयों की जानकारी ली है।

कमल की पंखुड़ियों को बिखेरने में जुटे मुकुल!

कोलकाता। राजनीति में कब क्या हो जाये कहा नहीं जा सकता। कल तक भाजपा के आंखों का तारा मुकुल राय आज तृणमूल कांग्रेस में हैं। उनकी घर वापसी शानदार रही। मुकुल राय के तृणमूल में जाने के बाद से भाजपा में कहासूनी भी शुरू हो गयी है। भाजपा के कुछ नेता अब कह रहे हैं कि उन्हें पहले से ही पता था कि मुकुल राय भाजपा ने टिक नहीं पायेंगे। इसमें कोई शक नहीं है कि मुकुल राय एक अच्छे रणनीतिकार व राजनीति के मजे खिलाड़ी हैं। लोकसभा चुनाव में उन्होेंने भाजपा के लिए काम करके यह साबित भी किया। बंगाल में भाजपा ने 18 सीट जीतकर चैका दिया था। अब खबर यह है कि तृणमूल कांगे्रस में आते ही मुकुल राय अपना जौहर दिखाने लगे हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा के 9 विधायकों और एक सांसद को फोन कर उनसे तृणमूल में शामिल होने के लिए कहा गया है। तृणमूल पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा के 3 विधायक और एक सांसद तृणमूल के संपर्क में हैं, ये कभी भी तृणमूल में शामिल हो सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि गत शुक्रवार को बनगांव में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष के नेतृत्व में भाजपा की सांगठनिक बैठक थी। इस बैठक में 3 भाजपा विधायकों को पहुंचना था जो नहीं पहुंचे थे। भाजपा सांसद शांतनु ठाकुर बैठक में नहीं आये थे। उनके अलावा गाइघाटा के विधायक सुब्रत ठाकुर, बागदा के विधायक विश्वजीत दास और बनगांव उत्तर के विधायक अशोक कीर्तनिया भी बैठक में नहीं आये थे।
विधायक विश्वजीत दास और भाजपा नेता सुनील सिंह के पार्टी से अलग सुर भी कई सवाल खड़े कर रही है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है कि कई नेता मौका देखकर भाजपा में आये थे। अब जबकि कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होने का समय है तो ऐसे ही अवसरवादी नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। हालांकि जो सच में लोगों की सेवा के लिए आये थे, वे भाजपा में हैं और आगे भी रहेंगे। तूफान आने पर घास, पत्ते भी भगवान की मूर्ति के माथे पर आ जाते हैं, लेकिन तूफान थमने के बाद उन्हें हटा दिया जाता है। जो खुद को घास, पत्ता समझते हैं वे तृणमूल में जाएंगे।

मुकुल रॉय जायेंगे राज्यसभा!

मुकुल रॉय की तृणमूल कांग्रेस में वापसी के बाद पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपस्थिति में मुकुल के तृणमूल में लौटने के बाद ही पार्टी के महासचिव पार्थ चटर्जी ने स्पष्ट कर दिया कि उनके आने से पार्टी की ताकत बढ़ी है। सूत्रों ने बताया है कि मुकुल रॉय को राज्यसभा भेजने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान राष्ट्रीय राजनीति में ममता बनर्जी की वैतरणी पार कराने के लिए मुकुल रॉय खेवनहार की भूमिका निभायेंगे।

खिलाड़ी से नेता बने पूर्व फुटबालर के समर्थन में उठ रही आवाज

गंगटोक। भारतीय फुटबॉल आइकन और राजनेता भाईचुंग भूटिया का पुतला जलाये जाने की घटना इन दिनों चर्चा के केंद्र बिंदु में है। सिक्किम के राजनीति में इसे लेकर खासी चर्चा है। दरअसल वाईचुंग का पुतला दक्षिण सिक्किम के सेंट्रल पार्क स्क्वायर में नामची के बीचों-बीच जलाया गया था। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में पुतला जलाने के दौरान समूहों में कुछ महिलाओं को दिखाया गया था। वाईचुंग भूटिया मुर्दाबाद के नारों के साथ पुतला फूंका गया। महिलाओं की पहचान दक्षिण सिक्किम नारी संघ (दक्षिण सिक्किम महिला विंग) की सदस्य के रूप में की गई है। बताते चले कि दक्षिण सिक्किम के नामची में 300 बिस्तरों वाले एक अस्पताल के निर्माण कार्य का शिलान्यास मुख्यमंत्री पीएस गोले द्वारा किया गया था। वाईचुंग ने इसका विरोध किया था। वाईचुंग की माने तो नए अस्पताल के निर्माण से खेल मैदान खत्म हो जायेगा। ये नामची का एकमात्र खेल मैदान है। साथ ही वाइचुंग भूटिया ने कहा था कि अस्पताल के निर्माण पर 500 करोड़ रूपये खर्च होंगे। फिलहाल इस पैसे को किसानों व वाहन चालकों के लिए खर्च करना चाहिए। ऐसे में वाईचुंग के समर्थक उनके साथ दिख रहे है। सिलीगुड़ी में भी वाईचुंग के समर्थन में आवाज उठी है।

दार्जिलिंग जिला कांग्रेस ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर किया प्रदर्शन

सिलीगुड़ी। पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने महंगाई को एक ऐसी तेजी दे दी है, जिससे हर सामान के दाम आसमान पर जा पहुंचा है। पेट्रोल-डीजल के साथ ही खाने वाले तेल के दाम भी आसमान छू रहे हैं। सरसो के तेल आज 200 रूपये प्रति लीटर से कही कीमत पर बिक रहा है। ऐसे में शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर दार्जिलिंग जिला कांग्रेस की ओर से केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। कांग्रेस समर्थकों ने एयरव्यू स्थित एक पेट्रोल पंप के समक्ष विरोध व प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं और समर्थकों के हाथ में प्लैकार्ड थे। इसके जरिये उन्होंने पेट्रोल पंप के समक्ष अपना विरोध जताया।
कांग्रेस के जिला अध्यक्ष व पूर्व विधायक शंकर मालाकार ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि भाजपा आज सत्ता में है और पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की कीमत लगातार बढ़ रहे हैं। करीब दो सौ प्रतिशत की दर से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े हैं। इससे आम लोगों का जीवन काफी कठिन हो गया है। मोदी सरकार ने अच्छे दिन के वादे किये लेकिन लोगों का जीवन मुश्किल भरा बन गया है। उन्होंने केंद्र सरकार की गलत नीतियों को जमकर विरोध किया। उनके साथ जिला कांग्रेस के अन्य नेता भी मौजूद रहे।

मुकुल राय बेटे साथ मिलेंगे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से!, अब क्या करेगी बीजेपी

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कोलकाता । भाजपा नेता मुकुल राय व राजीव बनर्जी के दोबारा तृणमूल में वापसी करने को लेकर चर्चा हो रही है। पिछले कई दिनों से राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार मुकुल राय ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कालीघाट स्थित उनके आवास पर मिलने का फैसला किया है। उनके साथ उनके पुत्र भी होंगे।
दरअसल मुकुल और राजीब की भाजपा से अचानक से दूरी बढ़ गयी है और यही कारण है जो दोनों को लेकर सवाल हो रहे हैं। वहीं राजीब बनर्जी ने ममता बनर्जी सरकार के पक्ष में जिस तरह प्रतिक्रिया दी हैं, उससे यह तो साफ हो गया कि राजीब का झुकाव अभी भी दीदी की ओर है। वहीं तृणमूल नेताओं की ओर से इशारों में ऐसे संकेत दिये जा रहे हैं जिससे मुकुल के तृणमूल में वापसी के कयास लगातार बढ़ते चले जा रहे हैं । हालांकि जो कुछ हो रहा है उससे भाजपा नेता भी अंजान नहीं हैं। भाजपा नेत्री लाकेट चटर्जी ने तो यहां तक कह दिया है कि जो सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए भाजपा में आये थे वह जा सकते हैं।
तृणमूल नेता सौगत राय ने कहा है कि अभिषेक बंद्योपाध्याय के साथ कई लोग तृणमूल में वापसी के लिए सम्पर्क साध रहे हैं। चुनाव से पहले बहुत नेताओं ने पार्टी छोड़ी लेकिन कभी ममता बनर्जी का अपमान नहीं किया। बताते चले कि डोमजूर में करारी हार के बाद राजीब ने भाजपा से दूरी बना ली। अब राजीब तृणमूल में आते है तो क्या उनका स्वागत किया जाएगा यह एक सवाल है। तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने घर वापसी करने वाले नेताओं के लिए साफ कह दिया है कि ममता बनर्जी ही अंतिम फैसला लेंगी। अभिषेक ने कहा है कि सिर्फ तृणमूल छोड़कर जाने वाले ही नहीं बल्कि भाजपा के कई विधायक भी तृणमूल में आने की इच्छा प्रकाश कर चुके है। अब देखना है कि इन नेताओं की तृणमूल में एंट्री कब तक और किस तरह से होती है। दरअसल विधानसभा चुनाव के समय तृणमूल कांग्रेस के काफी नेता बीजेपी में शामिल हो गये थे। उनमें बड़े नाम भी थे। लेकिन जब भाजपा को सत्ता नहीं मिली तो वे नेता फिर से तृणमूल में आने की राह खोज रहे हैं। सच तो यह है कि कुछ लोग सत्ता के साथ ही रहना चाहते हैं, क्योंकि सत्ता का अपना अलग अंदाज होता है। हालांकि अभी देखना बाकी है कि बंगाल की राजनीति में क्या कुछ होता है।

सुवेंदु अधिकारी के बाद बंगाल से भाजपा के तीन सांसद दिल्ली पहुंचे

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। उनके इस मुलाकात के तत्पश्चात राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गयी है। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री व सुवेंदु के बीच करीब 45 मिनट तक बैठक चली। इस दौरान दोनों नेताओं ने कई महत्वपूर्ण विषयों के साथ ही मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी चर्चा की। सुवेंदु ने राज्य में हिंसा को लेकर एक रिपोर्ट भी सौंपी है तथा बंगाल की मौजूदा स्थिति से उन्हें अवगत कराया है।
वहीं भाजपा हाईकमान के बुलावे पर बंगाल से भाजपा के तीन सांसद दिल्ली पहुंचे हुए हैं। इनमें भाजपा सांसद अर्जुन सिंह, सौमित्र खां और निशिथ प्रमाणिक शामिल हैं। अचानक से इन सांसदों के दिल्ली जाने को लेकर कयास लगाये जा रहे हैं। दरअसल विधानसभा चुनाव में वह सफलता नहीं मिली जिसकी भाजपा नेता उम्मीद कर रहे थे। ऐसे में भाजपा अपने आगे की रणनीति पर काम कर रही है। लेकिन गौर करें तो पाते हैं कि इन दिनों भाजपा के अंदरखाने में भी हलचल है। मुकुल राय जैसे दिग्गत नेता के फिर से तृणमूल में जाने की अटकल लग रही है।

हालांकि भाजपा के वरिष्ठ नेता लगातार इसे खारिज करते आ रहे हंै। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि सत्ता के साथ हर कोई रहना चाहता है। राज्य में तृणमूल कांग्रेस की सत्ता है और जो लोग भाजपा का दामन चुनाव से पहले थामे हैं उनमें कइयों का मन हिल रहा है। ऐसे में भाजपा के लिए भी वर्तमान हालात को संभालना चुनौतीपूर्ण होगा। खैर राजनीति में आना जाना सामान्य बात है, लेकिन इसे भाजपा खेमे में हलचल के तौर पर देखा जा रहा है।

बीजेपी के उम्मीदवारों के लिस्ट में मिथुन चक्रवर्ती का नाम नहीं है शामिल

पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए भाजपा ने अपनी उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें मिथुन चक्रवर्ती का नाम शामिल नहीं है। 7 मार्च को पीएम मोदी के साथ मंच साझा करने के बाद बीजेपी के सूत्र का कहना था कि मिथुन चक्रवर्ती चुनाव सबिहारी सीट से लड़ेंगे। जबकि बीजेपी के द्वारा जारी की गई उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट में सबिहारी सीट से रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रता साहा उम्मीदवार है।