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Birbhum Violence: “There is a conspiracy behind the Rampurhat incident,” says Mamata Banerjee

The CBI on Sunday started the process of taking statements in the investigation of the Rampurhat murder. Meanwhile, West Bengal CM Mamata Banerjee said, “if they (CBI) will only follow BJP’s directions, we will be ready to protest,” while addressing a programme in Siliguri today.

While speaking the Rampurhat incident she said that she still believes that there is a conspiracy behind all this. She welcome the Calcutta High Court’s decision and said that it’s a good decision that CBI took charge but also warned that if CBI only follows BJP’s direction they will protest.

“I still think there is a conspiracy behind the Rampurhat incident. CBI took over the charge, it is a good decision, but if they will only follow BJP’s directions, we will be ready to protest,” said West Bengal CM Mamata Banerjee in Siliguri.

Talking about the incident, Banerjee, who is on a six-day tour of north Bengal, said, “A Trinamool worker was killed by another party worker. But only TMC is being criticised everywhere. We have taken several steps to investigate the matter and to know the original cause of the incident. Many such incidents have taken place in Uttar Pradesh, Delhi, Karnataka, Tripura, and Assam. Our party workers were not allowed to reach the incident site, but in Birbhum, we never stopped any political party.”

राजस्थान के सालासर दरबार से आयी अखंड ज्योति भरती है जीवन में उजाला

सिलीगुड़ी। श्री सालासर दरबार ;धामद्ध के संस्थापक गुरुजी श्री छिंतरमल शर्मा का जीवन सालासर वाले बालाजी की सेवा और जन सेवा को समर्पित हो चुका है। मूल रूप से राजस्थान के फतेहपुर शेखावटी के रहने वाले गुरु जी की बचपन से ही पूजा-पाठ में रुचि थी। गुरू के सानिध्य में रहकर उन्होंने सालासर हनुमान जी की लंबे समय तक पूजा अर्चना व सेवा की। सालासर वाले हनुमान जी की ही कृपा है कि आज गुरुजी की कीर्ति चहुओर फैल चुकी हैंै। इनके पास जो कोई अपनी समस्या लेकर आता है, वह उनके पास से खुश होकर ही जाता है। 23 फरवरी 1990 को गुरुजी ने सिलीगुड़ी के संतोषी नगर में सालासर दरबार की नींव डाली थी। गुरुजी कहते हैं कि मंदिर स्थापना के 31 वर्ष होने को है। बाबा के दरबार में जो भी सच्चे मन से आता है, वह खाली हाथ नहीं लौटता है। सच्चे मन से मन्नत करने वालों को बाबा कभी निराश नहीं करते।

हरेक मंगलवार व शनिवार को सिलीगुड़ी नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्र बिहार, नेपाल, भूटान से भक्त आते हैं और बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। लेकिन चैतसूदी पूर्णिमा में हनुमान जयंती व अश्विनीसूदी पूर्णिमा में हनुमान महोत्सव के समय भक्तों का विशाल समागम होता है। साथ ही सावन महीने में एक महीने का महारुद्राभिषेक होता है। दरबार में बालाजी के अलावा भगवान शंकर, दुर्गा माता, अंजनी मा,ं श्री राम दरबार, पंचमुखी बालाजी व अन्य देवी देवता स्थापित हैं। उन्होंने बताया कि देश दुनिया से आने वाले भक्तों के ठहरने के लिए धर्मशाला का निर्माण हुआ है। यहां 16 भवन व हाॅल घर है। श्रद्धालु यहां ठहरते है।ं श्री सालासर भजन मंडल के परिचालन में गरीब कन्याओं का विवाह, गरीब बच्चों को शिक्षा, ग्रामीण क्षेत्र में लड़कियों को शिक्षित करना, योग शिक्षा, कंप्यूटर शिक्षा, गौरक्षा, चिकित्सा सेवा के कार्य भी किए जाते हैं।

इतना ही नहीं सालासर सेवा आश्रम के जरिये गौ सेवा से लेकर सेवाभाव से जुड़े काफी कुछ पूरे साल किये जाते हैं। सालासर दरबार में पूरी गोवर्धन पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य, स्वामी अवधेशानंद महाराज, स्वामी प्रियाधरण महाराज, कथावाचक शम्भुशरण से लेकर भूतपूर्व उप राष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत जैसी महान विभूतियां आकर दर्शन कर चुकी हैं।

सालासर धाम के सक्रिय कार्यकर्ता कैलाश शर्मा बताते हैं कि राजस्थान के सालासर धाम से आई अखंड ज्योति आज भी यहां जल रही है। अखंड ज्योति को लाने के लिए सिलीगुड़ी से उनके आलावा गोपाल अग्रवाल, कमल धानुका, श्याम सुंदर अग्रवाल ठाकुरगंज वाले, बजरंग लाल अग्रवाल, शंकर लाल अग्रवाल व अन्य 2001 में राजस्थान के सालासर दरबार पहुंचे थे। वहां से अखंड ज्योति लेकर यह सभी भक्त संकटमोचन ज्योति रथ के जरिये पदयात्रा करते हुए 45 दिनों में राजस्थान से सिलीगुड़ी पहुंचे थे। कहा जाये तो सिलीगुड़ी को धर्म की नगरी की आख्या दी गई है। यहां के धार्मिक स्थलों में सालासर दरबार भी शामिल है, जिसके प्रति भक्तों में एक अलग निष्ठा व भावना है। कहते हैं कि यहां आने वाले भक्तों को कभी खाली हाथ नहीं लौटना होता है।

महाकवि सम्मेलन में सिलीगुड़ी की कई महान रचनाकारों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया

सिलीगुड़ी। राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान ने साहित्य की सेवा करते हुए पूरे भारत में अपनी अलग पहचान बनायी है। इस संस्था की ओर से बुधवार को महाकवि सम्मेलन का आयोजन जूम एप्प पर किया गया। इसमंे विशिष्ट अतिथि के रुप मे पूर्व सांसद, प्रोफेसर, वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रोफेसर ओमपाल सिंह निडर ने उपस्थित हो कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई एवं अपनी साहित्यिक प्रतिभा से सभी का मन मोह लिया। सरस्वती वंदना से इस महाकवि सम्मेलन की शुरुआत हुई। श्रीमति सरस्वती मिश्रा जी ने अपनी मधुरी प्रस्तुति संग मां वीणा वादनी की स्तुति कर सबका मन मोह लिया। संस्था के इस कवि सम्मेलन का उदघाटन संस्था के संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष नवलपाल प्रभाकर दिनकर जी के द्वारा किया गया।

कार्यक्रम की व्यवस्था राष्ट्रीय महासचिव रुपेश कुमार जी के द्वारा की गई एवं पूरे कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवयित्री सह बिहार की अध्यक्ष श्रीमती बबिता सिंह के कर कमलों से किया गया। साथ मे श्रीमती वेद् स्मृति कीर्ति जी भी मौजूद रही जिन्होंने बबिता जी का साथ निभाया यानी संचालिका बबिता जी के साथ कदम से कदम मिलाते हुए पूरे कार्यक्रम मे हौसला अफजाई करती रही। इसमे साहित्यकार रजनी वर्मा,भोपाल, डाॅऽमधुकर राव लारोकर, बेंगलोर (कर्नाटक), वीना आडवाणी तन्वी नागपुर, गीता पाण्डेय अपराजिता रायबरेली, गरिमा विनित भाटिया अमरावती महाराष्ट्र, डॉ मंजु गुप्ता , वाशी , नवी मुंबई, आशा श्रीवास्तव भोपाल,भास्कर सिंह माणिक, कोंच, आशीष भारती, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश), डा.राधा वाल्मीकि, पंतनगर उत्तराखंड, ऋतु गर्ग, भारती सुजीत बिहानी, सिलीगुड़ी, आशा बंसल, सिलीगुड़ी, निशा गुप्ता,
सिलीगुड़ी, सुनीता कुमारी प्रसाद, डॉ रमणीक शर्मा अंबाला हरियाणा, नेतलाल प्रसाद यादव, गिरिडीह,झारखंड, नवीन नव बीगोद राजस्थान, सनुक लाल यादव, बालाघाट मध्यप्रदेश, स्मिता पाल (साईं स्मिता), झारखंड, प्रीतम कुमार झा,महुआ, वैशाली, बिहार, रमा बहेड हैदराबाद, मिथिलेश कुमार सिंह वाराणसी उत्तर प्रदेश, वेदस्मृति ‘कृती’, जितेंद्र कुमार चंद्राकर छत्तीसगढ़, सुधा बसोर, गाजियाबाद, कंचन वार्ष्णेय, कवि तुलसी विश्वास, डॉ. आशुतोष (रेवाड़ी हरियाणा), आशीष पाठक अटल , मधुबनी बिहार, सुरेन्द्र नाथ सिंह-गाजीपुर-उ.प्र, कल्पना भदौरिया स्वप्निल उत्तरप्रदेश, प्रोफेसर डॉ. सुनीता मिश्रा बिलासपुर छ.ग., डाँ मोहन लाल अरोड़ा , संस्था की राष्ट्रीय सचिव एव लाँ ऑफिसर सुप्रीम कोर्ट दिल्ली एडवोकेट अनुजा मनु जी लखनऊ उत्तर प्रदेश, वी अरुणा, कोलकता , भीम कुमार, झारखंड संगीता भारद्वाज, सिलीगुड़ी, ज्योति भाष्कर ज्योतिर्गमय, सहरसा, बिहार, कल्पना चैधरी, ऊ0 प्र0, प्रोफेसर प्रिसेस डॉ रचना सिंह रश्मि आगरा, अंजना सिन्हा , सीता देवी राठी, बंगाल, गीता पांडेय, इन्दु भुवन झा, मधुबनी, एडवोकेट रिन्की गुप्ता, सिलीगुड़ी, पूर्व पुलिस अधिकारी एव वरिष्ठ साहित्यकार कामेश्वर कुमार कमेश जी ने अपनी अतुलनीय रचना से सबका दिल मोह लिए एव बिहार की अध्यक्ष बबिता सिंह जी की मनमोहन रचना ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया । समापन की घोषणा बिहार की अध्यक्ष सह विशिष्ठ संचालिका बबिता सिंह जी के द्वारा राष्ट्रीय महासचिव रुपेश कुमार जी को मंच पर बुलाकर किया गया ।

जिसमे संस्था के बारे मे संक्षिप्त जानकारिया दी गई एवं पृथ्वी की परिकल्पना होती है बेटियाँ रचना से समाप्ति संबोधन किया गया। सिलीगुड़ी से आशा बंसल, नीशा गुप्ता, भारती सुजीत बिहानी, रिंकी गुप्ता, संगीता भारद्वाज, रितु गर्ग ने अपनी सुंदर प्रस्तुत की

हर मर्ज की दवा है ड्रैगन फ्रूट

विश्वविख्यात दार्जिलिंग फोर  टी के लिए मशहूर है। फोर टी यानि टिंबर, टी, ट्रेड और टूरिस्म । दार्जिलिंग जिले का नक्सलबाड़ी जो कभी नक्सल आंदोलन के लिए मशहूर था । 60  के दशक में यहां नक्सल पंथियों द्वारा व्यापक खूनी संघर्ष हुआ था । यूं कहे तो नक्सल नेता चारू मजमुदार के नेतृत्व में यहीं से नक्सलवाद की शुरुआत हुई थी। यह भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है। यह वही क्षेत्र है, जहां से सैकड़ों आदिवासी मजदूर अपने हक व अधिकारों के लिए हथियार उठाए थे ,लेकिन आज उसी नक्सलबाड़ी में विदेशी मूल का कैक्टस प्रजाति का ड्रैगंस फ्रूट्स अपने सुगंध बिखेर रहा है । नक्सलबाड़ी का हथीघिसा क्षेत्र इन दिनों कैक्टस प्रजाति के ड्रैगन फ्रूट की खेती को लेकर संजीदा दिख रहा है। यहां के आदिवासी किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती कर धन का उपार्जन कर रहे हैं । उनके इस कार्य में उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय का Centre of floriculture and agriculture management (COFAM) यूनिट की ओर से भी मदद मिल रही है। हाथिघिसा के किसान अशोक दे बताते है कि वह विगत 5 साल से इसकी खेती करते आ रहे है। उनकी तरह अन्य आदिवासी किसान भी इसकी खेती कर रहे है। इसकी खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे अधिक सिंचाई व खाद की जरूरत नहीं होती है। इसके पौधे को एक बार लगाने के बाद यह करीब 25 से 30 सालों तक फल देता रहता है। इसके लिए किसान को ज्यादा कुछ नहीं बल्कि अपने खेतों में कुछ पिलर खड़े करने होते हैं और उन पिलर के आसपास इन पौधों को लगानी होती है ।उस पिलर के सहारे अपने आप को इसके पौधे अपने को विकसित करते हैं तथा महज डेढ़ से 2 साल के भीतर फल देने लगते हैं । एक बार फल देने की शुरुआत के साथ ही यह बरसों बरसों तक सेवा देते रहते हैं। उत्तर बंगाल विश्व विद्यालय के कोफाम यूनिट के अमरेंद्र पांडे बताते हैं कि यह पौधा कोरियाई देशों से यहां आया है। समय के साथ इसकी खेती भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र व नेपाल, भूटान व बिहार के कुछ हिस्सों में तेजी से अपना प्रभाव छोड़ा है। काफी संख्या में किसान उनके पास आ रहे हैं तथा COFAM के सहयोग से खेती कर रहे हैं । बकायदा इसके लिए बाजार भी है । वर्तमान समय में प्रति किलो ढाई से तीन सौ रुपये किलोग्राम की दर से बाजार में बिक रहे हैं । किसान इसे अपने यहां से डेढ़ सौ से दो सौ रुपये प्रति किलो की दर से देते हैं । इस पौधे की सबसे अहम खासियत यह है कि यहां एक बार लगाने से ही 25 से 30 साल तक फलन होता रहता है। साथ ही इसकी देखभाल वह खेती काफी आसान है। इसमें लागत भी काफी सीमित है जबकि मुनाफा साल दर साल यह देते रहता है। श्री पांडे कहते हैं कि इस फल में काफी पोषक तत्व होने के साथ ही यह कई रोगों में कारगर सिद्ध हो रहा है। इसमें प्रोटीन, एनर्जी, कार्बोहाइड्रेट और शुगर जैसे पोषक तत्व तथा कैल्शियम आयरन, मैग्नीशियम, सोडियम जैसे मिनरल के साथ ही Anti-Oxidant , फ्लेवोनॉयड, फेनोलिक एसिड, एस्क्कारबिक एसिड जैसे तत्व मौजूद हैं। शुगर को नियंत्रित करने ,हार्ट की बीमारियों को नियंत्रित करने, वजन घटाने, पेट संबंधी समस्या, गठिया  तथा यह  इम्युनिटी सिस्टम को बढ़ाने वाला है। कई तरह के खनिज पदार्थों से भरपूर होने के साथ ही फाइबर युक्त है। इसमें कैंसर जैसे बीमारियों से लड़ने की क्षमता है तो शुगर के मरीजों के लिए भी यह रामबाण सिद्ध हो रहा है। यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग के अनरूप लोग उत्पादन पर जोर दे रहे हैं। इसके पौधे यानी चारा ₹100 से ₹150 की दर से बिक जाते हैं। इस पौधे की डाली का ही इस्तेमाल उसकी बीज के रूप में किया जाता है। इसलिए एक बार यदि किसान इसकी खेती कर ले तो उन्हें अन्यत्र से बीज या डाली लाने की आवश्यकता नहीं होती है। तकनीकी तौर पर उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय की COFAM शाखा किसानों की मदद कर रही है तथा उनका मार्गदर्शन कर रही है। उन्हें उम्मीद है कि एक दिन यह लीची, आम, सेव ,अमरुद, संतरा जैसे फलों की सूची में शामिल होगा और लोग इसकी बढ़-चढ़कर खेती करेंगे। इससे किसानों की आर्थिक सेहत भी निश्चित रूप से सुधरेगी। आज जब किसानों की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उन्हें कर्ज से दबकर आत्महत्या करने जैसे उपाय या कदम उठाने पड़ रहे हैं तो ऐसे में ड्रैगन फ्रूट्स की  खेती की नई प्रणाली किसानों को निश्चित रूप से एक नई राह प्रदान करेगी। COFAM का भी प्रयास है कि भारत के संकटग्रस्त किसानों को इस तरह के खेती के जरिए उबारा जाए। उनका यह भी कहना है कि एक पौधे से करीब साल में 15 से 20 किलो फल होते हैं। यदि कोई किसान एक एकड़ जमीन में इसकी खेती कर ले तो उसे साल में चार से पांच लाख रुपए की आमदनी आसानी से हो सकती है। इससे समझा जा सकता है कि इसकी खेती भारत के उन किसानों के लिए कितना मायने रखता है, जो आज की अव्यवस्था व आर्थिक कठिनाई की मार झेल रहे हैं। इसकी एक सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके सिंचाई में कोई खर्च नहीं है। साथ ही इसमें रासायनिक खाद का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं है। इसमें खाद के रूप में गोबर का खाद का ही इस्तेमाल किया जाता है ,इसलिए यह स्वास्थ्य सम्मत है।

सिलिगुड़ी हिंसा मामले मे बीजेपी के कैलाश विजयवर्गीय, तेजस्वी सूर्या समेत कई नेताओं के खिलाफ हुआ FIR दर्ज

पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में दिसंबर 7 को बीजेपी के द्वारा निकली गई  विरोध प्रदर्शन मार्च दौरान हुई हिंसा के मामले में दिसंबर 9 को बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गी, युवा मोर्चा के अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या, दिलीप घोष समेत बीजेपी के कई नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज किया गया। सिलिगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के न्यू जलपाईगुड़ी पुलिस स्टेशन में बीजेपी नेताओं पर ‘उत्तर-कन्या अभियान’ के दौरान हिंसा उकसाने के आरोप केस दर्ज किया। पुलिस ने बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हिंसा करने, कानून-व्यवस्था को तोड़ने, पुलिस के साथ झड़प करने और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगते हुए केस दर्ज किया। 7 दिसंबर को हुए विरोध प्रदर्शन में पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गयी और हिंसा दौरान कार्यकर्ता उलेन रॉय की मौत भी गयी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक उलेन रॉय की मौत शॉट-गन के छर्रों  से हुई थी। पर पुलिस दावा करती है कि शॉट-गन का प्रयोग नहीं हुआ है ,भीड़ को भागने के लिए उसने सिर्फ वाटर कैनन और आंसू गैस के गोलों पर प्रयोग गया  किया था। साथ ही साथ पुलिस ने आरोप लगाया है कि भीड़ में हथियार से लैस लोग थे और उन्होंने फायर किया।  बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने टीएमसी पर हमला बोलते हुए कहा कि यह पुलिस की नादिरशाही (क्रूरता) और ममता बनर्जी सरकार की अराजकता है. पुलिस और टीएमसी के गुंडों के बीच सांठगांठ है. पुलिस आँसू गैस का इस्तेमाल कर रही थी और गुंडे देशी बम फोड़ रहे थे।

 

तृणमूल सरकार का पाप का उड़ा भर चुका है,अब उसके पतन का समय आ गया है: भारती घोष

सिलिगुड़ी में 7 दिसंबर को हुए बीजेपी के रैली में बीजेपी कार्यकर्ता उलेन राय की मौत के बाद बीजेपी के पश्चिम  बंगाल के उपाध्यक्ष भारती घोष ने राज्य सरकार और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं पर रबर बुलेट चलाना गैर-कानूनी है। दिसंबर 8 को हुए कैंडल मार्च में शामिल होने के लिए पहुंची भारती घोष ने कहा कि राज्य में लगातार हिंसा और ज़ुल्म जारी है। राज्य सरकार और पुलिस की भूमिका सवाल उठाते हुए उन्होंने ने कहा कि अब गोली से न मार कर टीयर गैस व रबर बुलेट का अवैध ढंग से प्रयोग कर भाजपा कार्यकर्तों की हत्या की जा रही है। उन्होंने कहा, इतिहास ऐसे ही यहीं खत्म नहीं हो जाएगा। 2021 में भारतीय जनता पार्टी की बंगाल में सरकार बनेगी। इसके बाद जितने भी पुलिसकर्मी तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलकर दमन और हिंसा कर रहे हैं, उनका हिसाब लिया जाएगा। आगे उन्होने ने कहा कि तृणमूल सरकार का पाप का घड़ा भर चुका है अब उसके पतन का समय आ गया है। पंचायत चुनाव से अब तक सैकड़ों समर्थकों की हत्या। चाहे पुलिस अधिकारी हो या डॉक्टर सबकी जांच होगी।