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भूस्खलन से सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क पर यातायात बाधित

पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में शुक्रवार को भूस्खलन में राष्ट्रीय राजमार्ग 55 का एक हिस्सा बह गया। हालांकि अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। तिनधरिया के निकट गैरीगांव इलाके में तड़के राष्ट्रीय राजमार्ग का करीब 40 मीटर हिस्सा पूरी तरह बह गया। भूस्खलन से सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क पर यातायात बाधित हो गया है। ऐसी स्थिति में वाहनों को रोहिणी के रास्ते आवागमन कराया जा रहा है।

सड़क दुर्घटना में चालक सहित तीन की मौत

सिक्किम। पूर्व सिक्किम के चार माइल में कल रात एक सड़क दुर्घटना में वाहन के चालक सहित तीन लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी। घटना पाक्योंग थाना अंतर्गत क्षेत्र में हुई। मृतकों के शव को पाक्योंग पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिंगताम जिला अस्पताल में भेज दिया। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

20 जुलाई को माध्यमिक व 25 को उच्च माध्यमिक का रिजल्ट

कोलकाता । 20 जुलाई को माध्यमिक व 25 को उच्च माध्यमिक का रिजल्ट आ सकता है। शिक्षा विभाग के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सीबीएसई बोर्ड की तरह जुलाई में ही रिजल्ट निकाला जाएगा। अधिकारी के मुताबिक पहले ही कोरोना व लॉकडाउन के कारण काफी देर हो चुकी है। इस बारे अधिकारी ने बताया कि 20 जुलाई को माध्यमिक का परिणाम आ जाएगा। वहीं उच्च माध्यमिक पार्षद की ओर से कहा गया है 25 से 30 के अंदर रिजल्ट निकाल दिया जाएगा।
छात्रों के माध्यमिक परीक्षा में मूल्यांकन में अगर गड़बड़ी हुई तो माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सख्त कार्रवाई करेगा। इसमें स्कूल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। शनिवार को वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन की ओर से कहा गया है कि छात्रों को नम्बर देने में अगर कोई गड़बड़ी पायी गयी तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। उल्लेखनीय है कि कोरोना के कारण इस बार माध्यमिक व उच्चमाध्यमिक की परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया था। इसके बदले स्कूलों से उनका मूल्यांकन करने को कहा गया है। अब बोर्ड को ऐसा लगा है कि कुछ स्कूल इसमें छात्रों के मार्क्स बढ़ा सकते हैं, इसलिए बोर्ड की ओर से पहले ही चेतावनी दे दी गयी है। यहां बताते चलें कि दोनों बोर्ड ने शुक्रवार को मूल्यांकन मापदंड की घोषणा करते हुए कहा कि 2021 के लिए 10 वीं कक्षा के नतीजे में 50 – 50 फार्मूला का पालन होगा। इसके तहत छात्र की नौवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा और 10 वीं में आंतरिक मूल्यांकन को ध्यान में रखा जाएगा। वर्ष 2019 माध्यमिक (कक्षा दसवीं) परीक्षा में 7 विषयों में से 4 विषयों के सबसे ज्यादा अंक को भारांक मानने के साथ छात्र के 11 वीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा के अंक को ध्यान में रखा जाएगा। इस भारांक के साथ 12 वीं कक्षा के प्रोजेक्ट-प्रैक्टिकल में मिले कुल अंक को जोड़ा जाएगा। मूल्यांकन 40-60 के अनुपात (2019 के माध्यमिक के परिणाम के साथ चार विषयों के सबसे ज्यादा अंक और 11 वीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा के अंक) में होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि विज्ञान, कला विषयों के छात्रों के कक्षा 12 वीं में प्रैक्टिकल, प्रोजेक्ट के अंक को मूल्यांकन में जोड़ा जाएगा। साथ में यह भी कहा गया है कि अगर इस पद्धति पर अगर सभी राजी नहीं हुए तो बाद में परीक्षा ली जा सकती है।

सेवक -रंगपो रेल लाइन क्षेत्र में भूस्खलन से दो की मौत, 5 घायल

सिलीगुड़ी । लगातार हो रही बारिश के चलते पहाड़ों पर लगातार भूस्खलन हो रहा है। गुरूवार देर रात कलिम्पोंग के टनल नंबर 10, भालुखोला में भूस्खलन में वहां रात के समय काम कर रहे दो लोगों की मौत हो गयी तथा 5 अन्य घायल हो गये। घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मिली जानकारी के अनुसार सेवक -रंगपो रेल लाइन के लिए भालूखोला में टनलिंग का कार्य चल रहा है। कल रात लगभग 10.30 बजे के करीब 7 मजदूर कीचड़ में फंस गये।
बताया गया है कि लगातार बारिश के कारण चलते यह हुआ है। घटना के बाद वहां सभी फंसे श्रमिकों को तुरंत बाहर निकालकर कलिम्पोंग जिला अस्पताल भेजा गया। इस दौरान 2 लोगों मृत्यु इस दौरान हो गयी, जबकि पांच मजदूरों में से दो को सिलीगुड़ी के पैरामाउंट अस्पताल में तथा 3 को मामूली चोटों के साथ कलिम्पोंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना स्थल का स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने जायजा लिया है। प्रशासन हालात पर नजर बनाये हुए है।

लगातार हो रही बारिश से आईबीएम क्षेत्र में भूस्खलन

सिक्किम। पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश के चलते राज्य के विभिन्न इलाकों में क्षति पहुंची है। आज सुबह 10.30 बजे अचानक राष्ट्रीय राजमार्ग 10 अंतर्गत रंग्पो से 1 किलोमीटर दूर सिंगताम के आईबीएम क्षेत्र में भूस्खलन के कारण एक घंटे तक यातायात सेवा बंद रही। इसके चलते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लम्बी कतार देखने को मिली। एनएचआई डीसीएल के कर्मचारी मौके पर मशीन के साथ पहुंचकर सड़क के मलबे को हटाया। 11.30 बजे से राजमार्ग सुचारू हो पाया। दूसरी तरफ भूस्खलन क्षेत्र के ठीक उपरी हिस्से में विद्युत विभाग का टावर है। लगातार बारिश होती रही तो टावर नुकसान हो सकता है।

निगम प्रशासन ने हाॅकर्स कार्नर क्षेत्र की अवैध दुकानों पर बुलडोजर चलवाया

सिलीगुड़ी। सिलीगुड़ी नगर निगम की ओर से सिलीगुड़ी- जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण यानी एसजेडीए की जमीन पर बने हाॅकर्स कार्नर इलाके में अवैध कब्जे को लेकर रविवार को जोरदार अभियान चलाया गया। नगर निगम प्रशासन ने यहां के अवैध निर्माण को बुलडोजर के जरिये तोड़ दिया। एसएमसी प्रशासनिक बोर्ड के सदस्य रंजन सरकार व निगम के अन्य अधिकारी इस दौरान मौके पर मौजूद रहे। श्री सरकार ने कहा कि एसजेडीए की जमीन पर गैर कानूनी तरीके से दुकान बना लिए गये थे। ंकाफी समय से इसे हटा लेने के लिए कहा जा रहा था, लेकिन इस बारे में संबंधित दुकानदारों की ओर से कोई कदम नहीं उठाया । ऐसे में आज अवैध दुकानों को तोड़ दिया गया। किसी भी हालत में अवैध कब्जे को स्वीकार नहीं किया जायेगा।

रोटरी आहार सेवा की ओर से जरुरतमंदों को आहार

रोटरी क्लब सिलीगुड़ी मिडटाउन द्वारा संचालित रोटरी आहार सेवा की ओर से आज सिलीगुड़ी के गांधी मैदान एवं रेड लाइट एरिया में तकरीबन 350 जरुरतमंदों को आहार एवं बच्चों में बिस्कुट प्रदान किया गया। आज के सेवामूलक कार्य के सहयोगी सिलीगुड़ी मर्चेंट एसोसिएशन थी। मर्चेंट एसोसिएशन के प्रसिडेंट करण सिंह जैन के अलावा अन्य सदस्य भी उपस्थित थे। सिलिगुड़ी नगरपालिका के एडमिनिस्ट्रेटर सदस्य श्री रंजन सरकार एवं श्री विवेक बेद भी उपस्थित थे। रोटरी आहार सेवा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिदिन इस तरह के आहार प्रदान करती आ रही है । गत वर्ष 2020 के अक्टूबर माह में इस तरह के कार्यक्रम की शुरुआत कलब प्रेसिडेंट प्रवीण अग्रवाल के द्वारा की गई थी, जो १५ मई तक २१००० जरुरतमंद लोगों तक मुफ्त आहार का मुहैया कराया जा चुका है। प्रेसिडेंट प्रवीण अग्रवाल ने बताया कि आहार सेवा में अब धीरे धीरे अन्य सामाजिक संस्थान भी जुडते जा रहें है। तेरापंथ महिला विंग, सिलीगुड़ी सड़क परिवहन पुलिस लाइन के अलावा अन्य संस्था भी अब हमारे साथ जुडते जा रहे है, जिससे हमारे हौसले और भी बढ़ रहें हैं।

बीजेपी के उम्मीदवारों के लिस्ट में मिथुन चक्रवर्ती का नाम नहीं है शामिल

पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए भाजपा ने अपनी उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें मिथुन चक्रवर्ती का नाम शामिल नहीं है। 7 मार्च को पीएम मोदी के साथ मंच साझा करने के बाद बीजेपी के सूत्र का कहना था कि मिथुन चक्रवर्ती चुनाव सबिहारी सीट से लड़ेंगे। जबकि बीजेपी के द्वारा जारी की गई उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट में सबिहारी सीट से रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रता साहा उम्मीदवार है।

कृषि बिल: किसानों की आशंका जायज है

भारत में कृषि बिल को लेकर इन दिनों सड़क से लेकर संसद तक कोहराम मचा हुआ है। भारत के गांवों व नगरों में चौक -चौराहों पर कृषि बिल को लेकर ही चर्चा है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारत एक कृषि प्रमुख देश हैं। यहां की करीब 75 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर करती है। लेकिन दुःख तो तब होता है कि जब ऐसे देश में कृषि बिल 2020 को करोना जैसे महामारी के दौरान अध्यादेश के जरिये सामने लेकर आया जाता है और बाद में राज्यसभा जैसे उच्च सदन में बिना किसी चर्चा के इसे बहुमत से पास कर दिया जाता है। देश के लोगों को इस कानून के बारे में बताया तक नहीं जाता है। या फिर यह भी कह सकते हैं कि इस बारे में बताने की जरूरत नहीं समझी जाती है। हालांकि जिस बिल को लेकर पंजाब व हरियाणा के किसान दिल्ली में जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं, उस बिल के बारे में देश के करीब 60 प्रतिशत लोगों को सही ढंग से पता ही नहीं है। दरअसल कृषि बिल 2020 से सर्वाधिक बड़े किसानों के प्रभावित होने का खतरा है। यही कारण है कि भारत के छोटे किसान इस बिल के बारे में न तो समझना चाहते हैं और वह न ही इस आंदोलन को अपना समर्थन दे रहे हैं। एनडीए नीत केंद्र सरकार ने जो कृषि बिल 2020 लायी है। उसमें जिन बातों का उल्लेख किया गया हैं वह यह हैं कि कृषक उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) विधेयक 2020 के जरिये किसानों को अपने उत्पाद नोटिफाइड ऐग्रिकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग कमेटी (एपीएमसी) यानी तय मंडियों से बाहर बेचने की छूट होगी। इस कानून के तहत किसानों से उनकी उपज की बिक्री पर कोई सेस या फीस नहीं ली जाएगी।
लेकिन सवाल है कि यदि किसान अपनी उपज को पंजीकृत कृषि उपज मंडी समिति के बाहर बेचते हैं, तो राज्यों को राजस्व का नुकसान होगा क्योंकि वे ‘मंडी शुल्क‘ प्राप्त नहीं कर पायेंगे। यदि पूरा कृषि व्यापार मंडियों से बाहर चला जाता है, तो कमीशन एजेंट बेहाल होंगे। लेकिन, इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है, इससे अंततः न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) आधारित खरीद प्रणाली का अंत हो सकता है । वहीं दूसरा बिल मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) अनुबंध विधेयक 2020 है। कृषि उत्पादों को पहले से तय दाम पर बेचने के लिये कृषि व्यवसायी फर्मों, प्रोसेसर, थोक विक्रेताओं, निर्यातकों या बड़े खुदरा विक्रेताओं के साथ अनुबंध करने का अधिकार मिलेगा। लेकिन किसान संगठनों का मानना है कि इस कानून को बड़े उद्योगपतियों के अनुरूप बनाया गया है। यह किसानों की मोल-तोल करने की शक्ति को कमजोर करेगा। इसके अलावा, बड़ी निजी कंपनियों, निर्यातकों, थोक विक्रेताओं और प्रोसेसर को इससे कृषि क्षेत्र में बढ़त मिल सकती है।
साथ तीसरा बिल आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 है। प्रस्तावित कानून आवश्यक वस्तुओं की सूची से अनाज, दाल, तिलहन, प्याज और आलू जैसी कृषि उपज को युद्ध, अकाल, असाधारण मूल्य वृद्धि व प्राकृतिक आपदा जैसी ‘असाधारण परिस्थितियों‘ को छोड़कर सामान्य परिस्थितियों में हटाने का प्रस्ताव करता है तथा इस तरह की वस्तुओं पर लागू भंडार की सीमा भी समाप्त हो जायेगी। ऐसे में किसानों को आशंका है कि इससे बड़ी कंपनियों को भंडारण की छूट मिल जायेगी, जिससे वे किसानों पर अपनी मर्जी थोप सकेंगे।
वहीं सरकार का पक्ष है कि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था जारी रहेगी। इसके अलावा, प्रस्तावित कानून राज्यों के कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) कानूनों का अतिक्रमण नहीं करता है। इन विधेयकों से यह सुनिश्चित होगा कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिले, इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और निजी निवेश के साथ ही कृषि क्षेत्र में अवसंरचना का विकास होगा और रोजगार के अवसर पैदा हो।
लेकिन खास तौर से यहां चर्चा करना आवश्यक होगा कि किसानों की सबसे बड़ी चिंता एमएसपी व असेंशियल कमोडिटी बिल 2020 को लेकर है। सरकार भले ही यह कह रही है कि वह एमएसपी नहीं खत्म कर रही है, लेकिन किसानों को इस बात की गारंटी नहीं मिल रही है कि आने वाले समय में सरकार का यह वादा हवा- हवाई न हो जाये, क्योंकि सरकार बिल में संशोधन या इसे वापस लेने के बजाय लिखकर देने की बात कर रही है। लेकिन सरकार के लिखकर देने से क्या होता है। जरूरत है इन आशंकाओं को कानूनी अमली जामा पहनाने की।
जाने – माने स्तंभकार व साहित्यकार शैलेंद्र चौहान बताते हैं कि एमएसपी भारत में सबसे पहले साल 1966-67 में (प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के द्वारा) गेहूं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की गई थी। तब देश में हरित क्रांति की शुरुआत हुई थी और अनाज की तंगी से जूझ रहे देश में कृषि उत्पादन बढ़ाना सबसे प्रमुख लक्ष्य था। फसलों की एमएसपी तय करने में मुख्य आधार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की होती है। इसके अलावा सरकार राज्य सरकारों और संबंधित मंत्रालयों की राय भी जानी जाती है।
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की स्थापना साल 1965 में की गई थी। पहले इसका नाम कृषि कीमत आयोग था, जिसे 1985 में बदला गया। इसका काम ही है कि फसलों की लागत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की सिफारिश करना।
फिलहाल सीएसीपी के द्वारा 23 फसलों की सिफारिश की जाती है। इनमें 7 अनाज, 5 तरह की दालें, 7 तरह के तिलहन और 4 तरह की नकदी फसलें हैं। इस तरह एमएसपी की शुरुआत सिर्फ गेहूं से हुई थी और आज इसमें 23 फसलें हो गई हैं। इस सूची में समय-समय पर सरकारें बदलाव भी करती हैं। जैसे साल 2000 के आसपास इसमें 24 फसलें शामिल थीं। अब गन्ने की एमएसपी राज्य सरकारों द्वारा तय की जाती है। बड़ा सवाल यह भी है कि जरूरी सामान के स्टॉक की छूट इस कदर कैसे दी जा सकती है, कि जब कभी भी जो चाहे अपनी मनमानी को अंजाम दे सके। जरूरी खाद्य सामग्री के बेरोक-टोक जमाखोरी को काननू बैद्य करने की यह पहल निश्चित तौर पर भविष्य के खतरे को आगाह करती है। अब सवाल है कि आखिर किसान इतनी आशंकाओं को लेकर कहां जाएं। सवाल यह भी है कि क्या सरकार को पहले किसानों की शंका व आशंका का समाधान करते हुए कृषि बिल 2020 नहीं लाना चाहिए था ? जब हम कहते हैं कि किसान व जवान भारत की रीढ़ हैं तो केंद्र सरकार को हर हाल में इनकी शंका का समाधान करना चाहिए। लेकिन इसे उलट जिस तरह से किसानों को आतंकवादी, खालिस्तानी, रोहिग्या जैसे छदम उपनाम दिये जा रहे हैं, उससे कहीं न कहीं घोर निराशा होती है। क्योंकि लोकतंत्र में सवाल तो पूछे ही जाने चाहिए। समृद्ध व मजबूत लोकतंत्र की यही तो पहचान है।