राजीब बनर्जी राजनीति में तलाश रहे रास्ते!
कोलकाता। राजनीति में धैर्य की महिमा बड़ी है। कहा भी जाता है कि यदि आप में धैर्य नहीं है तो आप राजनीति में न आएं। बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस से कई नेता दल बदलते हुए बीजेपी मेें शामिल हो गये थे। अब वही नेता फिर से तृणमूल में आने की जुग्गत में हैए लेकिन पार्टी का दरवाजा उनके लिए बंद कर दिया गया है। विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने वाले राज्य के पूर्व मंत्री राजीब बनर्जी का समय उनका साथ नहीं दे रहा है। तभी तो पहले वह तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष से मुलाकात किये। इसके बाद पार्टी के महासचिव और शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के घर जाकर भी उनसे भेंट की थी। इसके बाद उनके तृणमूल में वापसी की अटकलें तेज हो गयी थीं। लेकिन लगता है काम बनते बनते रह गया। आखिरकार उन्होंने भाजपा नेतृत्व को दो पत्र भेजे हंै। इसमें उन्होंने लिखा है कि उनके इलाके डोमजूर में चुनाव बाद हिंसा के शिकार कई लोग अभी भी घर से लापता हैं। उन्हें घर लौटाने के लिए भाजपा नेतृत्व की मदद उन्होंने मांगी है। उन्होंने पहली चिट्ठी राज्य के महासचिव अमिताभ चक्रवर्ती को और दूसरी सह सचिव प्रताप बनर्जी को लिखी है।
अब माना जा रहा है कि इसके जरिए वह एक बार फिर पार्टी नेतृत्व को यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह पार्टी से दूर नहीं होना चाहते हैं। इधर भाजपा सूत्रों ने भी बताया है कि आगामी 29 जून को कोलकाता में भाजपा की कार्यकारिणी की बैठक होनी है। उसमें राजीब बनर्जी को भी आमंत्रित किया जाएगा। अब देखना है कि कार्यकारिणी की बैठक के बाद भाजपा उन्हें कितना महत्व देती है।

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