मुकुल राय बेटे साथ मिलेंगे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से!, अब क्या करेगी बीजेपी

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मुकुल राय बेटे साथ मिलेंगे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से!, अब क्या करेगी बीजेपी

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कोलकाता । भाजपा नेता मुकुल राय व राजीव बनर्जी के दोबारा तृणमूल में वापसी करने को लेकर चर्चा हो रही है। पिछले कई दिनों से राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार मुकुल राय ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कालीघाट स्थित उनके आवास पर मिलने का फैसला किया है। उनके साथ उनके पुत्र भी होंगे।
दरअसल मुकुल और राजीब की भाजपा से अचानक से दूरी बढ़ गयी है और यही कारण है जो दोनों को लेकर सवाल हो रहे हैं। वहीं राजीब बनर्जी ने ममता बनर्जी सरकार के पक्ष में जिस तरह प्रतिक्रिया दी हैं, उससे यह तो साफ हो गया कि राजीब का झुकाव अभी भी दीदी की ओर है। वहीं तृणमूल नेताओं की ओर से इशारों में ऐसे संकेत दिये जा रहे हैं जिससे मुकुल के तृणमूल में वापसी के कयास लगातार बढ़ते चले जा रहे हैं । हालांकि जो कुछ हो रहा है उससे भाजपा नेता भी अंजान नहीं हैं। भाजपा नेत्री लाकेट चटर्जी ने तो यहां तक कह दिया है कि जो सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए भाजपा में आये थे वह जा सकते हैं।
तृणमूल नेता सौगत राय ने कहा है कि अभिषेक बंद्योपाध्याय के साथ कई लोग तृणमूल में वापसी के लिए सम्पर्क साध रहे हैं। चुनाव से पहले बहुत नेताओं ने पार्टी छोड़ी लेकिन कभी ममता बनर्जी का अपमान नहीं किया। बताते चले कि डोमजूर में करारी हार के बाद राजीब ने भाजपा से दूरी बना ली। अब राजीब तृणमूल में आते है तो क्या उनका स्वागत किया जाएगा यह एक सवाल है। तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने घर वापसी करने वाले नेताओं के लिए साफ कह दिया है कि ममता बनर्जी ही अंतिम फैसला लेंगी। अभिषेक ने कहा है कि सिर्फ तृणमूल छोड़कर जाने वाले ही नहीं बल्कि भाजपा के कई विधायक भी तृणमूल में आने की इच्छा प्रकाश कर चुके है। अब देखना है कि इन नेताओं की तृणमूल में एंट्री कब तक और किस तरह से होती है। दरअसल विधानसभा चुनाव के समय तृणमूल कांग्रेस के काफी नेता बीजेपी में शामिल हो गये थे। उनमें बड़े नाम भी थे। लेकिन जब भाजपा को सत्ता नहीं मिली तो वे नेता फिर से तृणमूल में आने की राह खोज रहे हैं। सच तो यह है कि कुछ लोग सत्ता के साथ ही रहना चाहते हैं, क्योंकि सत्ता का अपना अलग अंदाज होता है। हालांकि अभी देखना बाकी है कि बंगाल की राजनीति में क्या कुछ होता है।

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