राजस्थान के सालासर दरबार से आयी अखंड ज्योति भरती है जीवन में उजाला

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राजस्थान के सालासर दरबार से आयी अखंड ज्योति भरती है जीवन में उजाला

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सिलीगुड़ी। श्री सालासर दरबार ;धामद्ध के संस्थापक गुरुजी श्री छिंतरमल शर्मा का जीवन सालासर वाले बालाजी की सेवा और जन सेवा को समर्पित हो चुका है। मूल रूप से राजस्थान के फतेहपुर शेखावटी के रहने वाले गुरु जी की बचपन से ही पूजा-पाठ में रुचि थी। गुरू के सानिध्य में रहकर उन्होंने सालासर हनुमान जी की लंबे समय तक पूजा अर्चना व सेवा की। सालासर वाले हनुमान जी की ही कृपा है कि आज गुरुजी की कीर्ति चहुओर फैल चुकी हैंै। इनके पास जो कोई अपनी समस्या लेकर आता है, वह उनके पास से खुश होकर ही जाता है। 23 फरवरी 1990 को गुरुजी ने सिलीगुड़ी के संतोषी नगर में सालासर दरबार की नींव डाली थी। गुरुजी कहते हैं कि मंदिर स्थापना के 31 वर्ष होने को है। बाबा के दरबार में जो भी सच्चे मन से आता है, वह खाली हाथ नहीं लौटता है। सच्चे मन से मन्नत करने वालों को बाबा कभी निराश नहीं करते।

हरेक मंगलवार व शनिवार को सिलीगुड़ी नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्र बिहार, नेपाल, भूटान से भक्त आते हैं और बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। लेकिन चैतसूदी पूर्णिमा में हनुमान जयंती व अश्विनीसूदी पूर्णिमा में हनुमान महोत्सव के समय भक्तों का विशाल समागम होता है। साथ ही सावन महीने में एक महीने का महारुद्राभिषेक होता है। दरबार में बालाजी के अलावा भगवान शंकर, दुर्गा माता, अंजनी मा,ं श्री राम दरबार, पंचमुखी बालाजी व अन्य देवी देवता स्थापित हैं। उन्होंने बताया कि देश दुनिया से आने वाले भक्तों के ठहरने के लिए धर्मशाला का निर्माण हुआ है। यहां 16 भवन व हाॅल घर है। श्रद्धालु यहां ठहरते है।ं श्री सालासर भजन मंडल के परिचालन में गरीब कन्याओं का विवाह, गरीब बच्चों को शिक्षा, ग्रामीण क्षेत्र में लड़कियों को शिक्षित करना, योग शिक्षा, कंप्यूटर शिक्षा, गौरक्षा, चिकित्सा सेवा के कार्य भी किए जाते हैं।

इतना ही नहीं सालासर सेवा आश्रम के जरिये गौ सेवा से लेकर सेवाभाव से जुड़े काफी कुछ पूरे साल किये जाते हैं। सालासर दरबार में पूरी गोवर्धन पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य, स्वामी अवधेशानंद महाराज, स्वामी प्रियाधरण महाराज, कथावाचक शम्भुशरण से लेकर भूतपूर्व उप राष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत जैसी महान विभूतियां आकर दर्शन कर चुकी हैं।

सालासर धाम के सक्रिय कार्यकर्ता कैलाश शर्मा बताते हैं कि राजस्थान के सालासर धाम से आई अखंड ज्योति आज भी यहां जल रही है। अखंड ज्योति को लाने के लिए सिलीगुड़ी से उनके आलावा गोपाल अग्रवाल, कमल धानुका, श्याम सुंदर अग्रवाल ठाकुरगंज वाले, बजरंग लाल अग्रवाल, शंकर लाल अग्रवाल व अन्य 2001 में राजस्थान के सालासर दरबार पहुंचे थे। वहां से अखंड ज्योति लेकर यह सभी भक्त संकटमोचन ज्योति रथ के जरिये पदयात्रा करते हुए 45 दिनों में राजस्थान से सिलीगुड़ी पहुंचे थे। कहा जाये तो सिलीगुड़ी को धर्म की नगरी की आख्या दी गई है। यहां के धार्मिक स्थलों में सालासर दरबार भी शामिल है, जिसके प्रति भक्तों में एक अलग निष्ठा व भावना है। कहते हैं कि यहां आने वाले भक्तों को कभी खाली हाथ नहीं लौटना होता है।

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