वित्त मंत्री ने जीएसटी परिषद की बैठक के अनुभव को कड़वा करार दिया
कोलकाता। जीएसटी परिषद की बैठक में कोविड के खिलाफ लड़ने वाली दवाओं व उपकरणों पर कम से कम जीएसटी लगाने की कोशिश की गयी। कुछ चीजों को जीएसटी के बोझ से बिल्कुल मुक्त रखा गया। लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से कोविड के खिलाफ लड़ने में उपयोग में आने वाली सभी चीजों पर किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं लगाने की मांग की गयी थी। अब बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा है कि केंद्र और राज्यों के बीच विश्वास की कमी के चलते जीएसटी परिषद की बैठकें कुछ विषाक्त माहौल वाली हो चलीं हैं। उन्होंने वित्त मंत्री निर्मता सीतारमण से इस विश्वास की बहाली के लिये ‘‘सुधारात्मक उपायों’’ पर विचार करने का आग्रह किया है। वित्त मंत्री को भेजे एक पत्र में अमित मित्रा ने यह भी दावा किया है कि केंद्र सरकार जीएसटी परिषद की बैठकों में ‘‘पहले से तय परिणाम’’ की सोच के साथ पहुंचती है।
मित्रा ने इससे पहले 13 जून को आरोप लगाया था कि जीएसटी परिषद की बैठक के दौरान उनकी आवाज को अनसुना कर दिया गया। वह कोविड के इलाज में काम आने वाली जरूरी सामग्री, दवाओं और टीके पर कर लगाने का विरोध किये थे। उन्होंने पत्र में कहा है, ‘‘जिस बात का मुझे सबसे ज्यादा दुख है वह यह कि जीएसटी परिषद की स्थापना के बाद से केंद्र और राज्यों के बीच आपसी विश्वास में आई कमी के कारण जीएसटी परिषद की बैठकें कटुतापूर्ण, अप्रिय और विषाक्त हो गई हैं। बड़ी बात यह है कि अगर इसी तरह से सबकुछ चलता रहा तो जीएसटी जैसे विषयों पर हमेशा आरोप – प्रत्यारोप ही चलते रहेंगे।

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