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मुकुल रॉय जायेंगे राज्यसभा!

मुकुल रॉय की तृणमूल कांग्रेस में वापसी के बाद पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपस्थिति में मुकुल के तृणमूल में लौटने के बाद ही पार्टी के महासचिव पार्थ चटर्जी ने स्पष्ट कर दिया कि उनके आने से पार्टी की ताकत बढ़ी है। सूत्रों ने बताया है कि मुकुल रॉय को राज्यसभा भेजने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान राष्ट्रीय राजनीति में ममता बनर्जी की वैतरणी पार कराने के लिए मुकुल रॉय खेवनहार की भूमिका निभायेंगे।

खिलाड़ी से नेता बने पूर्व फुटबालर के समर्थन में उठ रही आवाज

गंगटोक। भारतीय फुटबॉल आइकन और राजनेता भाईचुंग भूटिया का पुतला जलाये जाने की घटना इन दिनों चर्चा के केंद्र बिंदु में है। सिक्किम के राजनीति में इसे लेकर खासी चर्चा है। दरअसल वाईचुंग का पुतला दक्षिण सिक्किम के सेंट्रल पार्क स्क्वायर में नामची के बीचों-बीच जलाया गया था। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में पुतला जलाने के दौरान समूहों में कुछ महिलाओं को दिखाया गया था। वाईचुंग भूटिया मुर्दाबाद के नारों के साथ पुतला फूंका गया। महिलाओं की पहचान दक्षिण सिक्किम नारी संघ (दक्षिण सिक्किम महिला विंग) की सदस्य के रूप में की गई है। बताते चले कि दक्षिण सिक्किम के नामची में 300 बिस्तरों वाले एक अस्पताल के निर्माण कार्य का शिलान्यास मुख्यमंत्री पीएस गोले द्वारा किया गया था। वाईचुंग ने इसका विरोध किया था। वाईचुंग की माने तो नए अस्पताल के निर्माण से खेल मैदान खत्म हो जायेगा। ये नामची का एकमात्र खेल मैदान है। साथ ही वाइचुंग भूटिया ने कहा था कि अस्पताल के निर्माण पर 500 करोड़ रूपये खर्च होंगे। फिलहाल इस पैसे को किसानों व वाहन चालकों के लिए खर्च करना चाहिए। ऐसे में वाईचुंग के समर्थक उनके साथ दिख रहे है। सिलीगुड़ी में भी वाईचुंग के समर्थन में आवाज उठी है।

अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर जाने वाले लोगों के लिए वैक्सीनेशन शेड्यूल में बड़ा बदलाव

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बार फिर से कोवीशील्ड के वैक्सीनेशन शेड्यूल में बड़ा बदलाव किया है। दूसरे डोज का गैप विदेश यात्रा पर जा रहे लोगों के लिए घटाया गया है। कुछ कैटेगरी में दो डोज के लिए 84 दिन या 12 से 16 हफ्ते का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। दो डोज का गैप सिर्फ कोवीशील्ड के लिए घटाया गया है। कोवैक्सिन के दो डोज का गैप 28 दिन है और उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कोवीशील्ड के दो डोज के गैप में यह तीसरा बदलाव है। 16 जनवरी को टीकाकरण शुरू हुआ तो कोवीशील्ड और कोवैक्सिन में दो डोज का गैप 28 से 42 दिन का रखा गया था। पर 22 मार्च को कोवीशील्ड के दो डोज का अंतर 4 से 6 हफ्ते से बढ़ाकर 6 से 8 हफ्ते किया गया। फिर 13 मई को यह गैप बढ़ाकर 12 से 16 हफ्ते कर दिया गया।
नई गाइडलाइन उन लोगों के लिए है जिन्हें पहला डोज लग चुका है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर जाना है। यह यात्रा उन्हें पढ़ाई, रोजगार या ओलिंपिक टीम के हिस्से के तौर पर करनी पड़ सकती है। ऐसे लोगों को कोवीशील्ड के दूसरे डोज के लिए 84 दिन का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वे इससे पहले भी दूसरा डोज लगवा सकते हैं।
अन्य लोगों को यह राहत नहीं मिलने वाली। उन्हें दूसरा डोज लेने के लिए 84 दिनों का इंतजार करना ही होगा।

दार्जिलिंग जिला कांग्रेस ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर किया प्रदर्शन

सिलीगुड़ी। पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने महंगाई को एक ऐसी तेजी दे दी है, जिससे हर सामान के दाम आसमान पर जा पहुंचा है। पेट्रोल-डीजल के साथ ही खाने वाले तेल के दाम भी आसमान छू रहे हैं। सरसो के तेल आज 200 रूपये प्रति लीटर से कही कीमत पर बिक रहा है। ऐसे में शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर दार्जिलिंग जिला कांग्रेस की ओर से केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। कांग्रेस समर्थकों ने एयरव्यू स्थित एक पेट्रोल पंप के समक्ष विरोध व प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं और समर्थकों के हाथ में प्लैकार्ड थे। इसके जरिये उन्होंने पेट्रोल पंप के समक्ष अपना विरोध जताया।
कांग्रेस के जिला अध्यक्ष व पूर्व विधायक शंकर मालाकार ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि भाजपा आज सत्ता में है और पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की कीमत लगातार बढ़ रहे हैं। करीब दो सौ प्रतिशत की दर से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े हैं। इससे आम लोगों का जीवन काफी कठिन हो गया है। मोदी सरकार ने अच्छे दिन के वादे किये लेकिन लोगों का जीवन मुश्किल भरा बन गया है। उन्होंने केंद्र सरकार की गलत नीतियों को जमकर विरोध किया। उनके साथ जिला कांग्रेस के अन्य नेता भी मौजूद रहे।

राजस्थान के सालासर दरबार से आयी अखंड ज्योति भरती है जीवन में उजाला

सिलीगुड़ी। श्री सालासर दरबार ;धामद्ध के संस्थापक गुरुजी श्री छिंतरमल शर्मा का जीवन सालासर वाले बालाजी की सेवा और जन सेवा को समर्पित हो चुका है। मूल रूप से राजस्थान के फतेहपुर शेखावटी के रहने वाले गुरु जी की बचपन से ही पूजा-पाठ में रुचि थी। गुरू के सानिध्य में रहकर उन्होंने सालासर हनुमान जी की लंबे समय तक पूजा अर्चना व सेवा की। सालासर वाले हनुमान जी की ही कृपा है कि आज गुरुजी की कीर्ति चहुओर फैल चुकी हैंै। इनके पास जो कोई अपनी समस्या लेकर आता है, वह उनके पास से खुश होकर ही जाता है। 23 फरवरी 1990 को गुरुजी ने सिलीगुड़ी के संतोषी नगर में सालासर दरबार की नींव डाली थी। गुरुजी कहते हैं कि मंदिर स्थापना के 31 वर्ष होने को है। बाबा के दरबार में जो भी सच्चे मन से आता है, वह खाली हाथ नहीं लौटता है। सच्चे मन से मन्नत करने वालों को बाबा कभी निराश नहीं करते।

हरेक मंगलवार व शनिवार को सिलीगुड़ी नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्र बिहार, नेपाल, भूटान से भक्त आते हैं और बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। लेकिन चैतसूदी पूर्णिमा में हनुमान जयंती व अश्विनीसूदी पूर्णिमा में हनुमान महोत्सव के समय भक्तों का विशाल समागम होता है। साथ ही सावन महीने में एक महीने का महारुद्राभिषेक होता है। दरबार में बालाजी के अलावा भगवान शंकर, दुर्गा माता, अंजनी मा,ं श्री राम दरबार, पंचमुखी बालाजी व अन्य देवी देवता स्थापित हैं। उन्होंने बताया कि देश दुनिया से आने वाले भक्तों के ठहरने के लिए धर्मशाला का निर्माण हुआ है। यहां 16 भवन व हाॅल घर है। श्रद्धालु यहां ठहरते है।ं श्री सालासर भजन मंडल के परिचालन में गरीब कन्याओं का विवाह, गरीब बच्चों को शिक्षा, ग्रामीण क्षेत्र में लड़कियों को शिक्षित करना, योग शिक्षा, कंप्यूटर शिक्षा, गौरक्षा, चिकित्सा सेवा के कार्य भी किए जाते हैं।

इतना ही नहीं सालासर सेवा आश्रम के जरिये गौ सेवा से लेकर सेवाभाव से जुड़े काफी कुछ पूरे साल किये जाते हैं। सालासर दरबार में पूरी गोवर्धन पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य, स्वामी अवधेशानंद महाराज, स्वामी प्रियाधरण महाराज, कथावाचक शम्भुशरण से लेकर भूतपूर्व उप राष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत जैसी महान विभूतियां आकर दर्शन कर चुकी हैं।

सालासर धाम के सक्रिय कार्यकर्ता कैलाश शर्मा बताते हैं कि राजस्थान के सालासर धाम से आई अखंड ज्योति आज भी यहां जल रही है। अखंड ज्योति को लाने के लिए सिलीगुड़ी से उनके आलावा गोपाल अग्रवाल, कमल धानुका, श्याम सुंदर अग्रवाल ठाकुरगंज वाले, बजरंग लाल अग्रवाल, शंकर लाल अग्रवाल व अन्य 2001 में राजस्थान के सालासर दरबार पहुंचे थे। वहां से अखंड ज्योति लेकर यह सभी भक्त संकटमोचन ज्योति रथ के जरिये पदयात्रा करते हुए 45 दिनों में राजस्थान से सिलीगुड़ी पहुंचे थे। कहा जाये तो सिलीगुड़ी को धर्म की नगरी की आख्या दी गई है। यहां के धार्मिक स्थलों में सालासर दरबार भी शामिल है, जिसके प्रति भक्तों में एक अलग निष्ठा व भावना है। कहते हैं कि यहां आने वाले भक्तों को कभी खाली हाथ नहीं लौटना होता है।

मुकुल राय बेटे साथ मिलेंगे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से!, अब क्या करेगी बीजेपी

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कोलकाता । भाजपा नेता मुकुल राय व राजीव बनर्जी के दोबारा तृणमूल में वापसी करने को लेकर चर्चा हो रही है। पिछले कई दिनों से राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार मुकुल राय ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कालीघाट स्थित उनके आवास पर मिलने का फैसला किया है। उनके साथ उनके पुत्र भी होंगे।
दरअसल मुकुल और राजीब की भाजपा से अचानक से दूरी बढ़ गयी है और यही कारण है जो दोनों को लेकर सवाल हो रहे हैं। वहीं राजीब बनर्जी ने ममता बनर्जी सरकार के पक्ष में जिस तरह प्रतिक्रिया दी हैं, उससे यह तो साफ हो गया कि राजीब का झुकाव अभी भी दीदी की ओर है। वहीं तृणमूल नेताओं की ओर से इशारों में ऐसे संकेत दिये जा रहे हैं जिससे मुकुल के तृणमूल में वापसी के कयास लगातार बढ़ते चले जा रहे हैं । हालांकि जो कुछ हो रहा है उससे भाजपा नेता भी अंजान नहीं हैं। भाजपा नेत्री लाकेट चटर्जी ने तो यहां तक कह दिया है कि जो सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए भाजपा में आये थे वह जा सकते हैं।
तृणमूल नेता सौगत राय ने कहा है कि अभिषेक बंद्योपाध्याय के साथ कई लोग तृणमूल में वापसी के लिए सम्पर्क साध रहे हैं। चुनाव से पहले बहुत नेताओं ने पार्टी छोड़ी लेकिन कभी ममता बनर्जी का अपमान नहीं किया। बताते चले कि डोमजूर में करारी हार के बाद राजीब ने भाजपा से दूरी बना ली। अब राजीब तृणमूल में आते है तो क्या उनका स्वागत किया जाएगा यह एक सवाल है। तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने घर वापसी करने वाले नेताओं के लिए साफ कह दिया है कि ममता बनर्जी ही अंतिम फैसला लेंगी। अभिषेक ने कहा है कि सिर्फ तृणमूल छोड़कर जाने वाले ही नहीं बल्कि भाजपा के कई विधायक भी तृणमूल में आने की इच्छा प्रकाश कर चुके है। अब देखना है कि इन नेताओं की तृणमूल में एंट्री कब तक और किस तरह से होती है। दरअसल विधानसभा चुनाव के समय तृणमूल कांग्रेस के काफी नेता बीजेपी में शामिल हो गये थे। उनमें बड़े नाम भी थे। लेकिन जब भाजपा को सत्ता नहीं मिली तो वे नेता फिर से तृणमूल में आने की राह खोज रहे हैं। सच तो यह है कि कुछ लोग सत्ता के साथ ही रहना चाहते हैं, क्योंकि सत्ता का अपना अलग अंदाज होता है। हालांकि अभी देखना बाकी है कि बंगाल की राजनीति में क्या कुछ होता है।

कृषि बंधु योजना के तहत मिलेंगे दस हजार

कोलकाता। चुनावी घोषणापत्र में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किसानों को हर साल 10 हजार रुपये देने का वादा किया था। अपने वादे के तहत गुरुवार को राज्य सचिवालय नवान्न में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में किसानों को कृषक बंधु योजना के तहत हर साल 10 हजार रुपये देने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गयी। रुपये किसानों के बैंक खाते में एक बार में ही जमा कराया जायेगा।
फिलहाल इस योजना के तहत किसानों को हर साल 5000 रुपए मिलते थे। इसके साथ ही जिनकी एक एकड़ से कम जमीन है। उन्हें 4000 रुपये दिए जाएंगे। उन्हें पहले दो हजार रुपए मिलते थे। बताते चले कि केंद्र सरकार की ओर से भी बंगाल के किसानों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना के तहत हर साल छह हजार रुपये देना शुरू कर दिया है। इस योजना को ममता सरकार ने पहले लागू नहीं किया था।
बता दें कि विधानसभा चुनाव के दौरान किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि योजना की राशि नहीं मिलने पर पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने ममता सरकार पर हमला बोला था। इसके बाद ममता बनर्जी इस योजना को दो वर्ष बाद लागू करने को तैयार हुईं। पहली किस्त के रूप में करीब सात लाख किसानों को दो-दो हजार रुपये मिलेे हैं। अब ममता बनर्जी ने भी कृषि बंधु के तहत दस हजार देने को हरी झंडी दिखा दी है।

भारत- बांग्लादेश सीमा से चीनी नागरिक हिरासत में

मालदा। ंमालदा। भारत- बांग्लादेश सीमा पर मालदा के सुल्तानपुर सीमावर्ती इलाके से बीएसएफ ने एक चीनी नागरिक को हिरासत में लिया है। बताया गया है कि वह सीमा क्षेत्र में संदिग्ध रूप से घुम रहा था। उसका नाम हान जूम उई है। बीएसएफ द्वारा उससे पूछताछ की गयी है। साथ ही कालियाचक थाना पुलिस मामले को देख रही है।

सुवेंदु अधिकारी के बाद बंगाल से भाजपा के तीन सांसद दिल्ली पहुंचे

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। उनके इस मुलाकात के तत्पश्चात राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गयी है। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री व सुवेंदु के बीच करीब 45 मिनट तक बैठक चली। इस दौरान दोनों नेताओं ने कई महत्वपूर्ण विषयों के साथ ही मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी चर्चा की। सुवेंदु ने राज्य में हिंसा को लेकर एक रिपोर्ट भी सौंपी है तथा बंगाल की मौजूदा स्थिति से उन्हें अवगत कराया है।
वहीं भाजपा हाईकमान के बुलावे पर बंगाल से भाजपा के तीन सांसद दिल्ली पहुंचे हुए हैं। इनमें भाजपा सांसद अर्जुन सिंह, सौमित्र खां और निशिथ प्रमाणिक शामिल हैं। अचानक से इन सांसदों के दिल्ली जाने को लेकर कयास लगाये जा रहे हैं। दरअसल विधानसभा चुनाव में वह सफलता नहीं मिली जिसकी भाजपा नेता उम्मीद कर रहे थे। ऐसे में भाजपा अपने आगे की रणनीति पर काम कर रही है। लेकिन गौर करें तो पाते हैं कि इन दिनों भाजपा के अंदरखाने में भी हलचल है। मुकुल राय जैसे दिग्गत नेता के फिर से तृणमूल में जाने की अटकल लग रही है।

हालांकि भाजपा के वरिष्ठ नेता लगातार इसे खारिज करते आ रहे हंै। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि सत्ता के साथ हर कोई रहना चाहता है। राज्य में तृणमूल कांग्रेस की सत्ता है और जो लोग भाजपा का दामन चुनाव से पहले थामे हैं उनमें कइयों का मन हिल रहा है। ऐसे में भाजपा के लिए भी वर्तमान हालात को संभालना चुनौतीपूर्ण होगा। खैर राजनीति में आना जाना सामान्य बात है, लेकिन इसे भाजपा खेमे में हलचल के तौर पर देखा जा रहा है।

मशहूर डायरेक्टर और कवि बुद्धदेव दासगुप्ता का निधन


बंगाली फिल्मों के मशहूर डायरेक्टर और कवि बुद्धदेव दासगुप्ता का निधन हो गया है। वह 77 साल के थे। वह काफी समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे और डायलिसिस पर थे। उनके निधन से बंगाली फिल्म इंडस्ट्री को गहरा झटका लगा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी ट्वीट करते हुए शोक व्यक्त किया है। ममता बनर्जी ने बुद्धदेव दासगुप्ता के निधन को अपूरणीय क्षति बताया है। फिल्ममेकर के निधन पर संवेदनाएं जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि प्रख्यात फिल्म निर्माता बुद्धदेव दासगुप्ता के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। उनका निधन फिल्म जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
बुद्धदेव दासगुप्ता ने 5 बार अपनी फिल्मों के लिए नैशनल अवॉर्ड जीता है। उन्होंने कई बेहतरीन फिल्में बनाईंए जिनमें बाघ बहादुर, लाल दरजा, काल पुरुष और चराचर के अलावा उनकी ताहेदेर कोथा, निम अन्नपूर्णा, गृहयुद्ध और फेरा जैसी फिल्मों ने दर्शकों के दिल और दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी।
बुद्धदेव दासगुप्ता एक मशहूर कवि भी थे। उन्होंने ने स्कॉटिश चर्च कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री ली थी। वह सिटी कॉलेज में बच्चों को पढ़ाते भी थे और खाली समय में फिल्में बनाते थे। फीचर फिल्मों से पहले वह डॉक्यूमेंट्री फिल्मों से शुरुआत की थी। उनकी कई डॉक्यूमेंट्रीज को इंटरनैशनल अवॉर्ड भी मिले हैं। दरअसल उनका निधन निश्चित रूप से फिल्म जगत के लिए एक क्षति है। जिसकी भरपाई कभी नहीं होगी।