त्रीस्तरीय जांच के बाद सर्वाधिक सुरक्षित हेलिकॉप्टर दुर्घटना, क्या महज एक हादसा हेलिकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स व एकमात्र जिंदा बजे गुप कैप्टन पर टिकी निगाहें

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त्रीस्तरीय जांच के बाद सर्वाधिक सुरक्षित हेलिकॉप्टर दुर्घटना, क्या महज एक हादसा हेलिकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स व एकमात्र जिंदा बजे गुप कैप्टन पर टिकी निगाहें

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सिलीगुड़ी। देश के सर्वाधिक सुरक्षित हेलिकॉप्टर में सवार सर्वोच्च सैन्य अधिकारी जनरल बिपिन रावत समेत कई सैन्य अधिकारियों का दुर्घटनाग्रस्त होना पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पुरा देश शोक में डूबा है। सभी के दिलों में एक ही सवाल है, क्या यह महज एक हादसा था ? या इसके पीछे कोई बड़ा रहस्य काम कर रहा है ? क्योंकि देश के आतंकियों के लिए सीडीएस जनरल बिपिन रावत एक बड़ी चुनौती थे। घटना की छानबीन के लिये जांच दल गठित की गई है। घटनास्थल से हेलिकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स भी बरामद हुआ है। उम्मीद है जल्द ही इस सवाल का सही जवाब लोगों के सामने होगा। लोगों के दिलों में सवाल उठना भी लाजमी है। क्योंकि सर्बोच्च सैन्य अधिकारी समेत कई सैन्य अधिकारी व देश का सर्वाधिक सुरक्षित हेलिकॉप्टर जलकर राख हो गया है। जबकि इस तरह के वीआईपी मुवमेंट की स्थिति में हेलिकॉप्टर के उड़ने से पहले ही इसकी त्रीस्तरीय जांच होना प्रोटोकॉल है। सूत्रों के अनुसार, बुधवार को दुर्घटनाग्रस्त हुआ एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टर 26 घंटे से अधिक समय तक बिना किसी रुकावट के उड़ान भर चुका था। सूत्रों के अनुसार इस विशेष हेलीकॉप्टर की पिछली 2-3 उड़ानों में भी सिस्टम में कोई खराबी या कोई तकनीकी विफलता नहीं थी। इसके अलावे इस हेलिकॉप्टर की कई अन्य विशेषताएं हैं जैसे यह जल, थल व हवा में आसानी से चल सकता है। इंजन खराब होने पर आसानी से हवा में तैर सकता है। बिना पाइलट के भी यह उड़ने में सक्षम है। यह रेगिस्तान के रेतीले तूफान व सामुद्रिक आपदा में भी चलने में सक्षम है। घने कोहरे में चलने के लिए यह इमरजेन्सी लाइट व सर्चलाइट से लैस है। मुख्य टैंक के इंधन से 675 किलोमीटर व जरुरत पड़ने पर अन्य दो सहयोगी टैंक की मदद से 1200 किलोमीटर तक उड़ सकता है। अब सवाल उठता है कि फिर इतनी बड़ी खामी कहां रह गई जिसने देश के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी की जान ले ली।
हादसे में एकमात्र जिंदा बचे ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह वेलिंगटन हॉस्पिटल में लाइफ सपोर्ट पर है। सीडीएस जनरल बिपिन रावत की सुरक्षा में तैनात थे दार्जिलिंग निवासी सतपाल राई। दुर्घटना में उनका भी निधन हो गया। वह 41 वर्ष के थे। सतपाल दार्जिलिंग के ग्लेनबर्न चाय बागान के निवासी थे। कुन्नुर से उड़ान भरने से पहले भी सतपाल ने दार्जिलिंग में अपने घर अपने माता-पिता, पत्नी व बेटी के साथ वीडीओ कॉल पर बातचीत की थी। करीब डेढ़ घंटे बाद ही उनके घर पर यह दुखद समाचार उनके सेना जवान बेटे ने दिल्ली से फोन पर दी। घटना को लेकर दार्जिलिंग में ताकदा इलाका अपने सपूत के शोक में शोकाकुल है। घटनास्थल से हेलिकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स के बरामद कर लिया गया है। इस ब्लैक बॉक्स में करीब 80 गतिविधियों को प्रति सेकेंड रिकॉर्ड किया जाता है। इसमें 25 घंटे का रिकॉर्डिंग स्टोरेज रहता है। पायलटों की आपसी बातचीत व उनकी एयर ट्रैफिक कंट्रोल से हुई बातचीत भी रिकॉर्ड होता है। इसके जरिए जांच दल को घटना की छानबीन में काफी मदद की उम्मीद है।
जनरल बिपिन रावत बुधवार सुबह 9 बजे दिल्ली से उड़कर तमिलनाडु के सुलुर सेना कैंप फिर वहां से वेलिंगटन। वेलिंगटन से 11.45 बजे उड़ने के बाद 16 किलोमीटर दूर कुन्नुर के जंगल में यह भयावह दुर्घटना 12.20 बजे घटी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में घटना की जानकारी देते हुए बताया कि 12.08 बजे एटीसी से हेलिकॉप्टर का संपर्क टूट गया था। सीडीएस जनरल बिपिन रावत को देश उनके कारनामों के कारण हमेशा याद रखेगा। जब भी आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देने की बात आएगी तब तब उनका नाम बड़े सम्‍मान के साथ लिया जाएगा। म्‍यांमार में हुई सर्जिकल स्‍ट्राइक हो या फिर उरी हमले के बाद गुलाम कश्‍मीर में हुई सर्जिकल स्‍ट्राइक या फिर बालाकोट की एयर स्‍ट्राइक, सभी में उनकी बड़ी भूमिका रही। घटना को लेकर पूरे देश में शोक का माहौल है।

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